Israel Parliamentary Election: इजरायल में वोटों की गिनती शुरू हो गई है। बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी मुश्किल लग रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकार बनाने में अरब पार्टियों का रोल काफी अहम होने वाला है।

Israel Election Results: इजरायल के संसदीय चुनाव के नतीजों को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। शुरुआती रुझानों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में देश में त्रिशंकु संसद बनने की संभावना जताई जा रही है। एग्जिट पोल में भी किसी एक गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, ताजा एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को मामूली बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। दोनों खेमों के बीच कड़ी टक्कर के चलते अभी सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में नई सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

हमास के हमले के बाद पहला चुनाव

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में यह पहला चुनाव है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, हमास के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और सरकार की रणनीति प्रमुख मुद्दे बने रहे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने दुश्मनों के खिलाफ अपनी सख्त नीतियों और सैन्य अभियानों को उपलब्धि के तौर पर पेश किया। पार्टी ने मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उसकी सरकार देश की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही है।

विपक्ष ने उठाया सुरक्षा चूक का मुद्दा

दूसरी ओर, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनकी यशार पार्टी ने 7 अक्टूबर के हमले को लेकर सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। विपक्ष ने इस हमले को रोकने में हुई नाकामी को चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया। आइजनकोट ने वादा किया कि सत्ता में आने पर वह हमले से जुड़ी घटनाओं की जांच के लिए एक आयोग गठित करेंगे, ताकि सुरक्षा में हुई चूक और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

हमले में 1,200 लोगों की हुई थी मौत

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में इजरायल में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था। इस हमले के बाद इजरायल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। इसके बाद से ही सरकार की सुरक्षा नीति और युद्ध से जुड़े फैसले देश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

गाजा का भविष्य भी चुनावी मुद्दा

इजरायल के इस चुनाव में गाजा के भविष्य को लेकर भी मतदाताओं के बीच चर्चा रही। इसके अलावा, कट्टरपंथी युवाओं को सेना में अनिवार्य सेवा के दायरे में लाने का मुद्दा भी अहम रहा। इन सवालों पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

अरब पार्टियों पर टिकी सरकार गठन की उम्मीदें

शुरुआती रुझानों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के संकेतों के बीच अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि किसी भी खेमे को अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन नहीं मिलता है, तो दूसरे दलों का समर्थन सत्ता का समीकरण बदल सकता है। ऐसे में चुनाव का अंतिम परिणाम ही तय करेगा कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या विपक्ष को सरकार बनाने का मौका मिलेगा।