Indian Workers Exploitation in Italy: इटली के मिलान में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के निर्माण से जुड़े भारतीय मजदूरों के कथित शोषण के मामले में कैडेल कंस्ट्रक्शन करीब 3.1 करोड़ यूरो के समझौते पर पहुंची है। इसमें लगभग 2 करोड़ यूरो प्रभावित कामगारों के मुआवजे के लिए निर्धारित हैं। वास्तविक भुगतान मजदूरों की पात्रता और समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगा।
Indian Workers Compensation: विदेश में अच्छी नौकरी और बेहतर कमाई का सपना लेकर गए भारतीय मजदूरों के साथ इटली में शोषण का मामला सामने आया है। मिलान में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास परिसर के निर्माण में लगे भारतीय कामगारों ने आरोप लगाया कि उनसे लंबे समय तक काम कराया गया और रहने-खाने के नाम पर वेतन से बड़ी रकम काटी गई। अब अमेरिकी निर्माण कंपनी कैडेल कंस्ट्रक्शन (Caddell Construction) करीब 3.1 करोड़ यूरो यानी लगभग 335 करोड़ रुपये के समझौते पर पहुंची है। इसमें प्रभावित मजदूरों के मुआवजे के लिए करीब 2 करोड़ यूरो निर्धारित किए गए हैं।
नौकरी के नाम पर भारत से इटली बुलाए गए मजदूर
यह मामला इटली के मिलान शहर का है, जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के नए परिसर का निर्माण किया जा रहा था। भारतीय मजदूरों की भर्ती दिल्ली की एजेंसी डायनेमिक हाउस के माध्यम से की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2025 में इस परियोजना में 316 भारतीय मजदूर काम कर रहे थे।
मजदूरों का आरोप है कि इटली जाने से पहले उन्हें तीन साल की नौकरी और रहने की व्यवस्था का भरोसा दिया गया था। कुछ कामगारों ने नौकरी हासिल करने के लिए करीब 5,000 यूरो यानी लगभग 5 लाख रुपये खर्च किए। हालांकि, विदेश पहुंचने के बाद उन्हें वेतन और कामकाज की ऐसी शर्तों का सामना करना पड़ा, जो कथित तौर पर किए गए वादों से अलग थीं।
12 घंटे काम और वेतन से भारी कटौती के आरोप
जांच में सामने आए कुछ अनुबंधों में प्रति घंटे 1.31 से 1.91 यूरो तक वेतन दर्ज होने की बात कही गई है। आरोप है कि मजदूरों से रोजाना करीब 12 घंटे और सप्ताह में छह दिन काम कराया जाता था। रहने के खर्च के नाम पर हर महीने लगभग 500 यूरो काटे जाने की शिकायत भी सामने आई। इसके अलावा, भोजन पर भी मजदूरों को अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती थी।
कुछ कामगारों ने आरोप लगाया कि शर्तों का विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने या भारत वापस भेजने की धमकी दी जाती थी। इतालवी अभियोजकों ने मामले में श्रम शोषण और अर्ध-गुलामी जैसी परिस्थितियों की आशंका जताई है। हालांकि, आपराधिक जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
335 करोड़ रुपये के समझौते में किसे मिलेगा मुआवजा?
सितंबर 2026 में हुए समझौते के तहत करीब 2 करोड़ यूरो प्रभावित मजदूरों के मुआवजे के लिए रखे गए हैं। शेष राशि सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर चोट से जुड़े तंत्र के लिए निर्धारित की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 480 मजदूरों को भुगतान मिलने की उम्मीद है, जिनमें 316 भारतीय शामिल हैं।
यदि मुआवजे की कुल राशि को 480 मजदूरों में बराबर बांटकर देखें, तो औसत करीब 45 लाख रुपये प्रति व्यक्ति बैठता है। हालांकि, यह केवल गणितीय औसत है। वास्तविक भुगतान प्रत्येक मजदूर की पात्रता और समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगा।
विदेश में नौकरी करने वालों के लिए क्या है सबक?
यह मामला बताता है कि विदेश में नौकरी के नाम पर बड़ी रकम देने से पहले भर्ती एजेंसी, रोजगार अनुबंध, वेतन और कटौतियों की जांच करना कितना जरूरी है। नौकरी के लिए कर्ज लेने से कामगार शोषणकारी परिस्थितियों में फंस सकते हैं। इसलिए विदेश जाने से पहले लिखित अनुबंध की प्रति अपने पास रखें और जरूरत पड़ने पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या कानूनी सहायता से संपर्क करें।
