मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जबलपुर के ऐतिहासिक जल मंदिर और वीर बावड़ी का निरीक्षण किया। उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य की इस धरोहर को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की बात कही।
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को जबलपुर के ऐतिहासिक जल मंदिर और वीर बावड़ी परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चल रहे पुनरुद्धार कार्यों का अवलोकन किया।
गोंडवाना साम्राज्य की विरासत का जीवंत प्रमाण: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ये जल संरचनाएं गोंडवाना साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि यह धरोहरें हमारे इतिहास, संस्कृति और पारंपरिक जल संरक्षण की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।
पुनरुद्धार कार्यों और वास्तुकला की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा ने वीर बावड़ी की अनूठी वास्तुकला और इसके पुनरुद्धार कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों को इनके महत्व से अवगत कराना है।
लोक निर्माण मंत्री ने दी परियोजना की जानकारी
इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने जल मंदिर और वीर बावड़ी के पुनरुद्धार प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अब तक हुए कार्यों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी बताया।
रानी ताल और चेरी ताल के बीच स्थित वीर बावड़ी का ऐतिहासिक महत्व
रानी ताल और चेरी ताल के मध्य स्थित वीर बावड़ी के अवलोकन के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ एक जल संरचना नहीं है, बल्कि गोंडवाना साम्राज्य की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
रानी दुर्गावती के प्रकृति प्रेम और जल संरक्षण की मिसाल
यह वीर बावड़ी वीरांगना रानी दुर्गावती के प्रकृति प्रेम और लोक कल्याणकारी नीतियों का जीवंत प्रमाण मानी जाती है। उस समय जल संरक्षण के लिए अपनाई गई तकनीक आज भी प्रभावशाली और बेजोड़ मानी जाती है।
पारंपरिक जल प्रबंधन की अनूठी मिसाल
विशेषज्ञों के अनुसार, उस दौर में विकसित की गई जल संरक्षण तकनीकें आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। वीर बावड़ी इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जो जल प्रबंधन और स्थापत्य कला दोनों का अद्भुत संगम है।


