Delhi Kanwar Yatra: कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली में कांवड़ियों के वाहनों पर लगे DJ सिस्टम 110-120 डेसिबल का शोर पैदा कर रहे हैं. यह शोर लकड़ी काटने वाली आरी (चेनसॉ) जितना है और वाहनों के लिए तय 80 डेसिबल की कानूनी सीमा का खुला उल्लंघन है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों के लिए 8 रूट तय किए हैं.
Kanwar Yatra DJ: कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली की सड़कों पर लगे DJ का शोर 110 से 120 डेसिबल (dB) के कानफोड़ू स्तर तक पहुंच गया है. आपको अंदाजा लगे, इसलिए बता दें कि यह शोर इतना है जितना पास में चल रहे किसी चेनसॉ यानी लकड़ी काटने वाली आरी का होता है. यह शोर न सिर्फ परेशान करने वाला है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण के नियमों का सीधा-सीधा उल्लंघन भी है.
दिल्ली-यूपी के अप्सरा बॉर्डर जैसे एंट्री पॉइंट्स पर यह नज़ारा आम है, जहां से कांवड़िए शहर में दाखिल हो रहे हैं. ट्रकों और छोटी गाड़ियों को मॉडिफाई करके उन पर बड़े-बड़े साउंड सिस्टम और बूमबॉक्स लगाए गए हैं, जिनसे बेहद तेज़ आवाज़ में संगीत बज रहा है.
नियम क्या कहते हैं?
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के मुताबिक, किसी भी गाड़ी के लिए शोर की अधिकतम सीमा 80 डेसिबल तय की गई है. वहीं, रिहायशी इलाकों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने पर शोर का स्तर आसपास के माहौल से 10 डेसिबल ज़्यादा या 75 डेसिबल, जो भी कम हो, उससे ज़्यादा नहीं हो सकता.
लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिख रही हैं. 120 डेसिबल का शोर कानूनी सीमा से कहीं ज़्यादा है, लेकिन ऐसा लगता है कि कानून और व्यवस्था दोनों ही इस पर 'म्यूट' मोड में हैं. कमाल की बात है कि यह सब शहर की मुख्य सड़कों पर हो रहा है.
दिल्ली की इन सड़कों पर है कांवड़ियों का रूट
इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए शहर में 8 कॉरिडोर बनाए हैं. ये रूट दिल्ली की कुछ सबसे व्यस्त सड़कों से होकर गुज़रते हैं, जिससे आम ट्रैफिक पर भी असर पड़ना तय है.
इनमें रिंग रोड, मथुरा रोड, वज़ीराबाद रोड और ग्रैंड ट्रंक (GT) रोड जैसे अहम रास्ते शामिल हैं. इन्हीं रास्तों से होकर ये बड़े-बड़े स्पीकर वाले वाहन गुज़र रहे हैं, जिससे इन इलाकों में रहने वाले और सफर करने वाले लोगों को भारी शोर-शराबे का सामना करना पड़ रहा है.
