मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने आधिकारिक बैठकों में अपनी बैठने की दिशा क्यों बदल दी? सीएम बनने के बाद डी.के. शिवकुमार ने वास्तु और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कौन-कौन से कदम उठाए? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिशा बदलने को लेकर मुख्यमंत्री और मीडिया के बीच क्या बातचीत हुई?
बेंगलुरु: कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डी।के। शिवकुमार जब से कुर्सी पर बैठे हैं, उनका हर कदम और फैसला सुर्खियों में है। अपनी सियासी सूझबूझ के लिए मशहूर डीके शिवकुमार अब विधानसभा के गलियारों में अपने पक्के वास्तु विश्वास को लेकर चर्चा में हैं। आलम यह है कि सीएम ने अब आधिकारिक बैठकों में अपने बैठने की दिशा ही बदल दी है!

अज्जैय्या का आशीर्वाद, उत्तरी दरवाजे से एंट्री
डी।के। शिवकुमार की धर्म और वास्तु में गहरी आस्था रही है। सीएम बनने के फौरन बाद वह सबसे पहले अपने आराध्य 'अज्जैय्या गद्दुगे' के दर्शन करने पहुंचे थे। वहां से आशीर्वाद लेने के बाद ही उन्होंने आगे का काम शुरू किया। विधानसभा में भी उन्होंने वास्तु के हिसाब से सबसे शुभ माने जाने वाले 'उत्तरी दरवाजे' से ही एंट्री ली थी। इतना ही नहीं, अपने सीएम चैंबर में भी उन्होंने खास वास्तु पूजा करवाने के बाद ही कामकाज संभाला।
मीडिया को दिया निर्देश, आज हुआ लागू!
हाल ही में कैबिनेट मीटिंग के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी सीएम डी।के। शिवकुमार उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहते थे। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों को तुरंत दिशा बदलने का निर्देश भी दिया। लेकिन तब तक मीडियाकर्मी पुराने सिस्टम के हिसाब से ही अपने लाइव कैमरे सेट कर चुके थे। जब मीडिया वालों ने सीएम को बताया कि तुरंत सब कुछ बदलना तकनीकी रूप से मुश्किल है, तो डीके शिवकुमार ने कहा, 'तो फिर कल से इसे पक्का बदल देना' और वहां से चले गए।
अधिकारियों की मीटिंग में सीएम के नए अंदाज ने चौंकाया
सीएम का वो निर्देश आज पूरी तरह से लागू हो गया। आज विधानसभा के उसी कॉन्फ्रेंस हॉल में अधिकारियों की एक अहम बैठक रखी गई थी। बैठक में पहुंचे मुख्यमंत्री डी।के। शिवकुमार पूरी तरह से बदली हुई दिशा में बैठे थे। यानी, वास्तु शास्त्र के अनुसार सफलता और कामयाबी का प्रतीक मानी जाने वाली 'उत्तर दिशा' की ओर सीएम का मुंह था और अधिकारी उनके सामने बैठकर मीटिंग कर रहे थे।
राज्य के सबसे बड़े पद पर होने के बावजूद, डी।के। शिवकुमार का वास्तु और धार्मिक नियमों का इतनी सख्ती से पालन करना, फिलहाल विधानसभा और राजनीतिक गलियारों में हैरानी और गहरी दिलचस्पी का विषय बना हुआ है।
