क्या DK शिवकुमार की नई कैबिनेट में कई दिग्गज नेताओं की छुट्टी होने वाली है? क्या सिद्धारमैया अब कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर की बड़ी भूमिका निभाएंगे? क्या युवा नेताओं को आगे लाने से कांग्रेस में नई बगावत शुरू होगी? क्या अंदरूनी कलह से कांग्रेस और तृणमूल दोनों कमजोर पड़ रही हैं?
Karnataka Cabinet Reshuffle: कर्नाटक की सियासत में इस समय एक ऐसा भूचाल आया हुआ है, जिसने दक्षिण भारत के सबसे मजबूत कांग्रेसी गढ़ की नींव को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा मंजूर किए जाने के बाद, राज्य में 'ताश के पत्तों' की तरह सियासी समीकरण ढह रहे हैं। महीनों से पर्दे के पीछे चल रही शह और मात का खेल अब खत्म हो चुका है, और 'संकटमोचक' माने जाने वाले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivkumar) के सिर ताज सजना बिल्कुल तय है। लेकिन इस ताजपोशी के साथ ही कांग्रेस के भीतर एक ऐसा सस्पेंस गहरा गया है, जिसने कई दिग्गजों की रातों की नींद उड़ा दी है।

बूढ़े शेरों की विदाई या तख्तापलट? नई कैबिनेट में मचेगी भारी खलबली
बेंगलुरु के गलियारों में इस समय सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है-शिवकुमार की नई कैबिनेट में कौन रहेगा और किसका पत्ता कटेगा? राहुल गांधी के 'पीढ़ीगत बदलाव' (generational shift) के फॉर्मूले को अमलीजामा पहनाने के लिए शिवकुमार एक बेहद आक्रामक और युवा टीम तैयार करने की योजना बना रहे हैं। इस नई रणनीति का सबसे बड़ा शिकार पार्टी के वे बुजुर्ग चेहरे हो सकते हैं जो दशकों से सत्ता के केंद्र में रहे हैं।
कौन-कौन मंत्री खतरे में?
खतरे में दिग्गजों की कुर्सी: 70 की उम्र पार कर चुके गृह मंत्री जी. परमेश्वर, ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज और समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा जैसे कद्दावर नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर तलवार लटक गई है।
खाली पदों का गणित: डी सुधाकर के निधन और केएन राजन्ना व बी नागेंद्र के इस्तीफों के बाद कैबिनेट में पहले से ही तीन जगह खाली हैं। शिवकुमार इन खाली पदों और बुजुर्ग मंत्रियों की छुट्टी करके 50 साल से कम उम्र के युवा विधायकों की एक 'पॉलिटिकल स्ट्राइक फोर्स' तैयार करना चाहते हैं। लेकिन क्या ये सीनियर नेता बिना बगावत किए अपनी कुर्सी छोड़ देंगे? यह सस्पेंस बरकरार है।
सतीश जारकीहोली की 'सीक्रेट शर्त': प्रदेश अध्यक्ष पद पर फंसा पेच
मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद डीके शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष का पद छोड़ना होगा। इस बेहद पावरफुल पद के लिए लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली का नाम सबसे आगे चल रहे है। लेकिन खेल इतना सीधा नहीं है। जारकीहोली ने आलाकमान के सामने एक ऐसी 'गुप्त शर्त' रख दी है जिसने हाईकमान को कशमकश में डाल दिया है। वे संगठन की कमान तो संभालना चाहते हैं, लेकिन अपना मंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत को मानने वाली कांग्रेस क्या जारकीहोली की इस जिद के आगे झुकेगी? अगर नहीं, तो संगठन की यह अंदरूनी खींचतान शिवकुमार की ताजपोशी के जश्न को फीका कर सकती है।
सिद्धारमैया का अगला ठिकाना कहां? दिल्ली का तख्त या गुमनामी का रास्ता
इस पूरे सियासी ड्रामे का सबसे रहस्यमयी हिस्सा खुद सिद्धारमैया का भविष्य है। राज्यसभा सीट के ऑफर को सीधे तौर पर ठुकराकर उन्होंने साफ कर दिया है कि वे कर्नाटक की सक्रिय राजनीति से इतनी आसानी से दूर नहीं होने वाले। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें दिल्ली बुलाकर कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष या 'चीफ नेशनल स्ट्रैटेजिस्ट' बनाया जा सकता है। कर्नाटक कांग्रेस इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है जहां जरा सी भी चूक 2029 के सपनों को चकनाचूर कर सकती है। यह बदलाव शिवकुमार के नेतृत्व को 'अमर' बनाएगा या पार्टी के भीतर एक नए गृहयुद्ध को जन्म देगा, इसकी पटकथा अगले कुछ दिनों में लिखी जाने वाली है।


