लॉ स्टूडेंट आलिया असादी ने कर्नाटक में हिजाब बैन हटने का स्वागत किया है। उन्होंने पिछली सरकार पर छात्रों को उकसाने का आरोप लगाते हुए, प्रभावित छात्राओं के लिए फिर से परीक्षा कराने की मांग की।

बेंगलुरु: कर्नाटक में हिजाब पर लगा बैन हटाने के फैसले का लॉ स्टूडेंट आलिया असादी ने स्वागत किया है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'पिछली सरकार ने हमारे सेकंड ईयर पीयूसी एग्जाम से सिर्फ दो महीने पहले हिजाब बैन करने का फैसला किया था। यह सब उडुपी के हमारे सरकारी कॉलेज के तत्कालीन अध्यक्ष रघुपति भट और मौजूदा अध्यक्ष यशपाल सुवर्णा के उकसावे पर किया गया था।'

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'BJP सरकार ने छात्रों को भगवा गमछा पहनने के लिए उकसाया'

आलिया ने आरोप लगाया कि उस वक्त की बीजेपी सरकार ने ही छात्रों को भगवा गमछा पहनने के लिए उकसाया था। उन्होंने कहा, 'हमने अपनी परीक्षा के आखिरी दिन तक तत्कालीन सरकार से गुहार लगाई, लेकिन हमें न्याय देने के बजाय सड़क पर छोड़ दिया गया। हमें अपराधी की तरह दिखाने की साजिश रची गई। हमारे कॉलेज के लिए बनाया गया नियम पूरे राज्य में लागू कर दिया गया। इसके बाद हमें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा और आखिर में यह एक लंबी कानूनी लड़ाई बन गई।'

हम मौजूदा सरकार से लगातार यह मांग कर रहे थे। दो साल बाद हमें यह मौका मिला है। हिजाब के साथ-साथ सभी धर्मों के पहनावे की इजाजत देना भी एक स्वागत करने वाला कदम है। हालांकि, यह भी सच है कि पीयूसी तक हिजाब बैन के अलावा किसी और को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ा था।

'यह एक खुशी का दिन है'

आलिया ने आगे कहा, 'जो भी हो, कर्नाटक के छात्रों के लिए यह एक खुशी का दिन है। सरकार को उन छात्राओं के लिए फिर से परीक्षा करानी चाहिए, जो बैन की वजह से एग्जाम नहीं दे पाई थीं। मैं सरकार को यह भी सलाह देना चाहती हूं कि वह सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इस मामले में खुद आगे बढ़कर सकारात्मक दलीलें पेश करे और केस को खत्म करवाए। मैं राज्य के शिक्षा विभाग को धन्यवाद देती हूं।'