लखनऊ कोचिंग सेंटर आग त्रासदी ने एक प्रेम कहानी को अधूरा छोड़ दिया। नीलेश कुमार और अनामिका सामंत की तय शादी से पहले मौत ने कई सवाल खड़े किए, जबकि 15 जानें एक ही आग में बुझ गईं।
लखनऊ: तरक्की की सीढ़ियां चढ़ता करियर, चेहरे पर सगाई की ख़ुशियां और आंखों में आने वाले कल के हसीन सपने-27 साल के नीलेश कुमार की ज़िंदगी अपनी सबसे खूबसूरत दिशा में आगे बढ़ रही थी। लेकिन किसे पता था कि जिस इमारत में उन्होंने अपने सुनहरे भविष्य की नींव रखी थी, वही एक दिन काल का ग्रास बन जाएगी। अलीगंज के एक प्रमुख कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने न केवल 15 मासूम जिंदगियों को लील लिया, बल्कि दो ऐसे दिलों को भी हमेशा के लिए खामोश कर दिया, जो कुछ ही दिनों में एक दूजे के होने वाले थे। इस हादसे ने नीलेश और उनकी मंगेतर, 30 वर्षीय अनामिका सामंत की प्रेम कहानी का ऐसा दर्दनाक अंत किया है, जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक के दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

प्यार का आगाज़ और सात फेरों की तैयारी: जब दो राज्यों के परिवार मिले
नीलेश और अनामिका की मुलाकात इसी कोचिंग सेंटर में काम करने के दौरान हुई थी। साथ काम करते-करते दोनों में प्यार हुआ और उन्होंने अपनी आगे की ज़िंदगी साथ बिताने का फैसला किया। दोनों के बीच सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था। पिछले ही हफ़्ते, अनामिका के माता-पिता खास तौर पर पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे, ताकि शादी की औपचारिकताओं को आगे बढ़ाया जा सके।
पश्चिम बंगाल अनामिका के घर जाने की तैयारी में था नीलेश का परिवार
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर आंसुओं से भीगी आंखों के साथ नीलेश के भाई अभिषेक ने बताया: "अनामिका और नीलेश की सगाई (रोका) कुछ दिन पहले ही हुई थी। हमारे घर पर एक छोटा और बेहद आत्मीय समारोह हुआ था। अनामिका बहुत खुशमिजाज और जिंदादिल लड़की थी। उस रस्म के बाद से हम सभी बस शादी की तैयारियों के जश्न में डूबे हुए थे।" परिजनों ने बताया कि शादी अगले साल तय हुई थी। नीलेश के परिवार ने अगले ही हफ़्ते पश्चिम बंगाल में अनामिका के पैतृक घर जाने के लिए ट्रेन के टिकट भी बुक करा लिए थे। लेकिन विडंबना देखिए, जिस तारीख को उन्हें समधियाने जाना था, अब उस दिन चारों तरफ सिर्फ मातम पसरा हुआ है।
अनदेखी चेतावनियां और राख होते सुनहरे सपने
तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर के नीलेश अपने परिवार में बेहद मेहनती और जिम्मेदार बेटे के रूप में जाने जाते थे। इस साल उन्हें नौकरी में शानदार प्रमोशन और सैलरी हाइक मिला था। रिश्तेदारों के मुताबिक, नीलेश अपनी शादी से पहले आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर होना चाहते थे। वे अपनी बचत से परिवार के लिए एक नया घर बनवा रहे थे और उनकी ख्वाहिश थी कि अगले साल जब नया घर बनकर तैयार हो जाए, तो वे अनामिका को उसी घर में ब्याह कर लाएं।
कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सोमवार को लगी इस भीषण आग ने न सिर्फ इस जोड़े को जुदा किया, बल्कि उनके साथ 13 अन्य छात्रों और कर्मचारियों की उम्मीदों को भी जलाकर राख कर दिया। यह हादसा देश भर के कोचिंग हब्स की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है, जहां अनदेखी चेतावनियों और लचर नागरिक नियमों की कीमत आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। जो इमारत कभी युवाओं के सपनों को संवारने का जरिया थी, वह आज एक डरावने खंडहर में तब्दील हो चुकी है।


