मूडीज के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट से भारत की तेल सप्लाई पर गंभीर खतरा है। भारत अपने कच्चे तेल का 46% वहीं से आयात करता है। वैकल्पिक मार्गों के बावजूद, 2026 तक भी सप्लाई का सामान्य होना मुश्किल है।
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से भारत जैसे तेल आयातक देशों को तेल और गैस की सप्लाई में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भले ही ये देश दूसरे समुद्री रास्तों के लिए द्विपक्षीय बातचीत करें, लेकिन 2026 तक भी तेल ट्रांसपोर्ट का पहले की तरह सामान्य हो पाना मुश्किल है।

GDP घटने की आशंका?
मूडीज ने अपनी जियोपॉलिटिकल खतरों पर जारी ग्लोबल रिपोर्ट में कहा, 'भारत सबसे ज्यादा जोखिम वाले देशों में से एक है। इसकी वजह यह है कि भारत अपने कुल कच्चे तेल का लगभग 46% मिडिल ईस्ट से ही आयात करता है। इसके अलावा, रुपये की कीमत में गिरावट का भी भारत पर असर पड़ेगा।'
इससे पहले मूडीज ने अनुमान लगाया था कि तेल संकट की वजह से भारत की जीडीपी 6.8% के बजाय 6% तक गिर सकती है। यह नई रिपोर्ट इसी के बाद आई है।
रिपोर्ट में और क्या है?
मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, 'हम उम्मीद करते हैं कि चीन, भारत, जापान और कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देश ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। हो सकता है कि लारक़ द्वीप और ओमान के समुद्री रास्ते से एक अलग तेल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जाए। हालांकि, 2026 में भी सप्लाई का युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटना मुश्किल है।'
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर अगले 6 महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित रास्ता फिर से शुरू हो भी जाता है, तब भी तेल बाजार में सप्लाई सीमित ही रहेगी। ज्यादा मांग और कीमतों में उतार-चढ़ाव का देशों पर बड़ा असर पड़ेगा। मूडीज का अनुमान है कि इस साल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती है।
