धार की भोजशाला में 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ होने के चलते सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और RAF तैनात हैं। जिला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार दोनों पक्षों के लिए पृथक व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है।

भोपाल/धार। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व और जुमे की नमाज एक ही दिन होने के कारण जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरे भोजशाला क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

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पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती

प्रशासन ने भोजशाला परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। इसके साथ ही संवेदनशील स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी मौके पर लगाया गया है। प्रशासन का साफ कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने बताया कि भोजशाला से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। इसी क्रम में 22 जनवरी को जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों के साथ बैठक की और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसकी भावना से अवगत कराया।

दोनों पक्षों के लिए पृथक व्यवस्था

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर में दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रवेश और निकास के रास्ते भी अलग रखे गए हैं, ताकि किसी प्रकार का टकराव न हो और सभी गतिविधियां शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें।

पूरे शहर में चाक-चौबंद सुरक्षा

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि केवल भोजशाला ही नहीं, बल्कि पूरे धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। हर संवेदनशील स्थान पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि कानून व्यवस्था किसी भी स्थिति में न बिगड़े।

सुप्रीम कोर्ट की अपील: सहिष्णुता और सामंजस्य जरूरी

कलेक्टर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदायों से सहिष्णुता, सामंजस्य और आपसी भाईचारे के साथ प्रशासन और राज्य सरकार का सहयोग करने की अपील की है। कोर्ट की भावना का स्पष्ट अर्थ है कि प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों को सभी पक्ष स्वीकार करें, तभी शांति और सौहार्द बना रह सकता है।

कोर्ट के आदेश की मूल भावना क्या है?

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हिंदू समुदाय के लिए वही स्थान तय किया गया है, जहां वे पूर्व परंपरा के अनुसार पूजा करते रहे हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज की अलग व्यवस्था की गई है।

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पूजा और नमाज का समय पूरी तरह पृथक

कोर्ट के आदेश में यह भी साफ किया गया है कि दोनों समुदायों की धार्मिक गतिविधियां—चाहे वह बसंत पंचमी का आयोजन हो या दोपहर 1 से 3 बजे के बीच होने वाली जुमे की नमाज—पूरी तरह अलग और निर्विघ्न रूप से संपन्न होनी चाहिए। इसके लिए मुस्लिम समुदाय के लिए अलग स्थान, अलग प्रवेश और अलग निकास सुनिश्चित किया गया है।

कानून व्यवस्था सर्वोपरि: जिला प्रशासन

जिला प्रशासन ने दोनों समुदायों को यह भी बताया है कि वे सुरक्षित स्मारक क्षेत्र को छोड़कर, किन रास्तों से परिसर में प्रवेश और निकास कर सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि सहमति या असहमति से ज्यादा बड़ा विषय कानून व्यवस्था बनाए रखना है, और इसके लिए सभी का सहयोग जरूरी है।