भोपाल में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने समय-सीमा में काम पूरा करने, मंथली मॉनिटरिंग, गुणवत्ता जांच के लिए तकनीकी विंग बनाने के निर्देश दिए।
भोपाल। राजधानी में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। इस बैठक में विभिन्न वर्किंग एजेंसियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।
कई निर्माण एजेंसियों के कार्यों का किया गया रिव्यू
बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग बोर्ड, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पीआईयू, आईडीए, बीडीए, यूडीए और भवन विकास निगम जैसी एजेंसियों द्वारा संचालित निर्माण परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल और आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय श्रीमती शिल्पा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।
तय समय-सीमा में काम पूरा करने के सख्त निर्देश
मंत्री श्री सिंह ने सभी एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि जो एजेंसी तय समय पर कार्य पूरा नहीं करेगी, उसके खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंथली मॉनिटरिंग और चरणबद्ध लक्ष्य तय करने पर जोर
मंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा हर महीने की जाए। इसके साथ ही स्टेप-बाय-स्टेप और मंथ-बाय-मंथ लक्ष्य तय कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य पूरे किए जाएं। सभी एजेंसियों को अपनी स्पष्ट कार्ययोजना विभाग को सौंपने के निर्देश भी दिए गए।
निर्माण गुणवत्ता की निगरानी के लिए बनेगा तकनीकी विंग
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मंत्री श्री सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग में एक तकनीकी विंग गठित करने के निर्देश दिए। यह विंग विभागीय जांच दल के रूप में कार्य करेगा और निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और मानकों की नियमित जांच करेगा। उन्होंने कहा कि मजबूत चेक एंड बैलेंस सिस्टम विकसित करना जरूरी है।
थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन रिपोर्ट अनिवार्य
मंत्री ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए कि थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से विभाग को प्रस्तुत की जाए, ताकि निर्माण कार्यों की निष्पक्ष और तकनीकी जांच सुनिश्चित हो सके।
सांदीपनि विद्यालयों की अधोसंरचना पर भी समीक्षा
बैठक में सांदीपनि विद्यालयों से जुड़ी प्रयोगशालाओं, अतिरिक्त कक्षों, खेल मैदानों और अन्य शैक्षणिक अधोसंरचना से संबंधित निर्माण कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।


