टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला टी-20 मैच 4 विकेट से शानदार तरीके से जीत लिया। इस ऐतिहासिक जीत के बीच सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय क्रिकेटर नमन धीर की हो रही है। जो कभी क्रिकेट छोड़कर कनाडा जाने का प्लान बना चुके थे।
क्रिकेटर बनने का सपना पूरा करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न हो और लगातार मौके भी न मिल रहे हों। पंजाब के नमन धीर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनके पिता नरेश धीर फरीदकोट में मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं। एक समय ऐसा आया जब नमन क्रिकेट छोड़कर कनाडा जाने के बारे में सोचने लगे थे, लेकिन पिता की एक सलाह ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज नमन आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलने के बाद भारतीय टीम तक पहुंच चुके हैं।
चार साल तक नहीं मिला बड़ा मौका
नमन धीर ने पंजाब की अंडर-16 टीम के लिए खेलकर अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, इसके बाद उन्हें कई साल तक बड़े स्तर पर खेलने का मौका नहीं मिला। लगातार इंतजार और अनिश्चितता के कारण वह निराश होने लगे थे। साल 2022 में उन्होंने क्रिकेट छोड़कर कनाडा जाने का मन भी बना लिया था, जहां उनकी बहन रहती हैं।
पिता ने कहा- एक साल और कोशिश करो
जब नमन क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोच रहे थे, तब उनके पिता नरेश धीर ने उन्हें एक और साल मेहनत करने की सलाह दी। पिता की बात मानकर नमन ने क्रिकेट को एक और मौका दिया। यह फैसला उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ।
दिसंबर 2022 में नमन ने पंजाब की ओर से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। इसके बाद उनके प्रदर्शन में सुधार आया और साल 2023 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया।
मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं पिता
नमन के पिता नरेश धीर मेडिकल स्टोर पर नौकरी करते हैं। परिवार के लिए क्रिकेट का खर्च उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने बेटे के सपने को पूरा करने में उसका साथ दिया। नमन की सफलता के पीछे उनके पिता के अलावा उनके नाना और बचपन के कोच गगन सिद्धू का भी योगदान रहा।
आईपीएल से टीम इंडिया तक पहुंचा सफर
नमन ने मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल में अपनी पहचान बनाई। आईपीएल 2025 से पहले फ्रेंचाइजी ने उन्हें 5.25 करोड़ रुपये में रिटेन किया। सितंबर 2026 में उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया। इसके बाद उन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी कदम रखा।
नमन धीर की कहानी बताती है कि मुश्किल समय में सही सलाह और लगातार मेहनत किसी खिलाड़ी का रास्ता बदल सकती है। जिस क्रिकेट को छोड़ने का वह मन बना चुके थे, उसी ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचा दिया।









