NEET Re-Test Pressure: NEET री-टेस्ट से पहले हैदराबाद में 19 वर्षीय छात्रा की मौत ने बढ़ाए सवाल। सुसाइड नोट में लिखा-‘कोई ज़िम्मेदार नहीं’, लेकिन परीक्षा दबाव, मानसिक तनाव और छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं का रहस्य गहराया।

Hyderabad NEET Student Death: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव छात्रों के लिए किस कदर जानलेवा साबित हो रहा है, इसका एक और रूह कंपा देने वाला उदाहरण हैदराबाद से सामने आया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के री-टेस्ट से ठीक एक दिन पहले, एक 19 वर्षीय छात्रा ने मौत को गले लगा लिया। इस घटना ने एक बार फिर देश की शिक्षा प्रणाली, कोचिंग सेंटरों के माहौल और छात्रों पर डाले जा रहे मानसिक दबाव को लेकर गंभीर और डरावने सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा की मेज पर सजी किताबों के बीच से एक और जिंदगी का यूं खामोशी से चले जाना, पूरे समाज के लिए एक बड़ा झटका है।

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शनिवार की वो काली रात: मियापुर के अपार्टमेंट में जब थम गईं सांसें

यह दर्दनाक वाकया हैदराबाद के मियापुर इलाके का है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, 19 साल की शेख सना (19) मियापुर के ही एक अपार्टमेंट में अपनी बहनों के साथ रहकर मेडिकल की सबसे बड़ी परीक्षा 'NEET' की तैयारी कर रही थी। रविवार को उसका री-एग्जाम होना था, जिसके लिए वह दिन-रात पढ़ाई में जुटी थी। शनिवार की रात जब उसकी बहनें दूसरे कमरे में थीं, तब इस छात्रा के कमरे में एक ऐसा खौफनाक सन्नाटा पसरा, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। रविवार सुबह जब पुलिस को सूचना मिली, तो मौके पर पहुंचने पर पता चला कि लड़की ने शनिवार रात को ही कमरे में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। परीक्षा के एडमिट कार्ड और किताबों के बीच उसका बेजान शरीर झूलता मिला।

आखिरी खत का सस्पेंस: 'मेरी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं...'

घटनास्थल की छानबीन के दौरान मियापुर पुलिस को मृतका के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस सुसाइड नोट ने मामले में सस्पेंस और गम को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अपने आखिरी खत में लड़की ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया। उसने लिखा, "मेरी इस मौत के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है।" भले ही खत में किसी इंसान का नाम न हो, लेकिन जांच अधिकारियों और मनोवैज्ञानिकों का साफ मानना है कि इस मौत के पीछे का असली गुनहगार वह अदृश्य "अकादमिक दबाव" और "नाकामी का डर" है, जो रविवार को होने वाले NEET री-एग्जाम के रूप में उसके सिर पर मंडरा रहा था। पुलिस को पूरा शक है कि री-टेस्ट के भारी मानसिक तनाव को वह 19 साल की बच्ची बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। उसके पिता शेख जाफर हुसैन कुवैत में काम करते हैं, जबकि उसकी मां लगभग 10 दिन पहले आंध्र प्रदेश के प्रोड्डटूर गई थीं। सना की बहनें 10वीं और 6वीं कक्षा में पढ़ती हैं। पुलिस ने बताया कि बच्चों की देखभाल उनकी मौसी कर रही हैं।

देशव्यापी 'डेथ ट्रेंड': परीक्षा के चक्रव्यूह में क्यों फंस रही हैं मासूम जिंदगियां?

हैदराबाद की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। हाल के दिनों में NEET की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच आत्महत्या का एक बेहद चिंताजनक और डरावना पैटर्न (Trend) सामने आया है। कुछ ही दिनों पहले, गाजियाबाद में एक 22 वर्षीय छात्र और कोयंबटूर में एक 19 वर्षीय छात्र ने भी ठीक री-एग्जाम से पहले अपनी जान दे दी थी। वहीं, अहमदाबाद में एक 17 साल के छात्र ने परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे मानसिक अवसाद के कारण मौत को गले लगा लिया था। इन सभी मामलों में एक बात कॉमन है-परीक्षा में असफल होने का डर और समाज की उम्मीदों का बोझ। हर बार परीक्षा के नजदीक आते ही छात्रों का मानसिक संतुलन डगमगाने लगता है।

सिस्टम पर भड़का गुस्सा: जांच और बदलाव की उठती मांग

इस खौफनाक सुसाइड के बाद हैदराबाद समेत देश के कई हिस्सों में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। कोयंबटूर से लेकर हैदराबाद तक, शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही तय करने और छात्रों के लिए एक मजबूत मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अधिकारी इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं, लेकिन सवाल वही बना हुआ है: क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि एक परीक्षा किसी बच्चे की जिंदगी से ज्यादा कीमती हो गई है? जब तक इन प्रतियोगी परीक्षाओं के चक्रव्यूह और दबाव को कम नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे आत्मघाती कदमों को रोकना नामुमकिन होगा।