AISA प्रेसिडेंट नेहा बोरा मौजूदा दिल्ली के प्रोटेस्ट का जेन-जी चेहरा बन चुकी हैं। इतना ही नहीं CJP लीडरशिप से उनकी स्ट्रैटेजी भी अलग है। तभी तो राहुल गांधी भी उनके साथ कदमताल मिलाकर चले। बीच उनकी रणनीति और राजनीतिक सफर को जानना दिलचस्प है।
नई दिल्ली। छात्र राजनीति में नेहा बोरा इन दिनों चर्चा में हैं। NEET और NET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से लेकर करीब 23 दिनों की भूख हड़ताल तक, उनकी सक्रियता ने उन्हें छात्र राजनीति में पहचान दिलाई है। वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएचडी कर रही हैं। नेहा की कहानी का एक दिलचस्प पहलू उनका थिएटर से जुड़ाव भी है। वह पढ़ाई के साथ सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रही हैं। वहीं, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हाथ पकड़कर चलने वाली तस्वीर या घटना को उनकी रणनीति से जोड़ने से पहले उसका संदर्भ समझना जरूरी है।
छात्र राजनीति में नेहा बोरा की क्या है रणनीति?
नेहा बोरा छात्र अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन करती रही हैं। NEET और NET परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने छात्रों के साथ आवाज उठाई। करीब 23 दिनों की भूख हड़ताल भी उनके आंदोलनकारी सफर का अहम हिस्सा रही है। उनकी सक्रियता का मुख्य केंद्र छात्र, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे हैं।
थिएटर से भी जुड़ा है नेहा का सफर
नेहा केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं हैं। वह JNU में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं। थिएटर और नुक्कड़ नाटक सामाजिक मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं। नेहा का थिएटर से जुड़ाव उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि का एक खास पहलू है।
CJP से कितनी अलग है उनकी रणनीति?
CJP की रणनीति से नेहा बोरा के काम की तुलना करने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि यहां CJP से किस संगठन या नेता का मतलब है। दोनों के आंदोलनों, मुद्दों और काम करने के तरीकों की जानकारी के बिना उनके बीच अंतर बताना सही नहीं होगा।
राहुल-प्रियंका से जुड़ी तस्वीर की क्या है कहानी?
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ नेहा बोरा के हाथ पकड़कर चलने की घटना का संदर्भ भी स्पष्ट होना चाहिए। इसकी तारीख, जगह और मौके की पुष्टि के बिना यह दावा नहीं किया जा सकता कि दोनों नेताओं ने किसी खास रणनीति के तहत उनका हाथ थामा था।
क्यों चर्चा में हैं नेहा बोरा?
नेहा बोरा की पहचान छात्र राजनीति, शिक्षा से जुड़े आंदोलनों और थिएटर के मेल से बनी है। NEET और NET के मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें चर्चा में लाया है। उनके राजनीतिक सफर को समझने के लिए आंदोलनों के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को भी देखना जरूरी है।


