NEET Paper Leak Controversy: NEET पेपर लीक विवाद पर संसद की संयुक्त समिति में NTA अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे गए। विपक्ष ने पूछा कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ तो री-एग्जाम क्यों कराया गया। NTA ने भविष्य में CBT मोड पर भी बड़ा संकेत दिया है।
NTA Parliamentary Committee: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर विवाद एक बार फिर संसद तक पहुंच गया है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े मुद्दों पर गठित संसदीय संयुक्त समिति की बैठक में गुरुवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency के अधिकारियों से पेपर लीक, जांच और दोबारा परीक्षा कराने को लेकर कई अहम सवाल पूछे गए।

करीब पांच घंटे चली इस बैठक में विपक्षी सांसदों ने NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं NTA अधिकारियों ने संसदीय समिति के सामने साफ कहा कि वे फिलहाल NEET मामले को “पेपर लीक” नहीं मानते, क्योंकि इसकी जांच अभी CBI कर रही है।
संसद की समिति में क्या हुआ?
सूत्रों के मुताबिक बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम 4 बजे तक चली। इसमें शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ NTA के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर विपक्षी सांसदों ने लगातार सवाल उठाए। जब NTA से पूछा गया कि क्या परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, तो एजेंसी के अधिकारियों ने जवाब दिया कि जब तक Central Bureau of Investigation अपनी जांच पूरी कर आधिकारिक रूप से इसे पेपर लीक नहीं बताती, तब तक एजेंसी इसे लीक नहीं मानेगी।
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विपक्ष का बड़ा सवाल- ‘फिर री-एग्जाम क्यों?’
NTA के इस जवाब पर विपक्षी सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सूत्रों के अनुसार विपक्ष के एक सांसद ने पूछा कि अगर पेपर लीक नहीं हुआ था, तो फिर दोबारा परीक्षा कराने की जरूरत क्यों पड़ी? इस सवाल के जवाब में NTA अधिकारियों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं और छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए री-एग्जाम कराया गया। यही जवाब अब राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि अगर परीक्षा निष्पक्ष थी तो दोबारा परीक्षा का फैसला खुद कई सवाल खड़े करता है।
दिग्विजय सिंह ने भी पूछे कई सवाल
सूत्रों के मुताबिक समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने भी NTA अधिकारियों से परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल किए। बैठक के दौरान पेपर सेटिंग, वितरण प्रणाली और परीक्षा केंद्रों की निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि कुछ विपक्षी सांसदों ने मांग की कि जांच रिपोर्ट संसदीय समिति के सामने रखी जाए ताकि पूरे मामले की पारदर्शिता बनी रहे।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच भी अलग-अलग रुख देखने को मिला। सूत्रों के अनुसार सत्ता पक्ष के कुछ सांसद NTA की दलीलों का समर्थन करते नजर आए। जब विपक्षी सांसदों ने CBI जांच रिपोर्ट समिति के सामने पेश करने की मांग उठाई, तब कुछ सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि CBI एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है और उसे बिना राजनीतिक दबाव के अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
NTA ने सुधारों को लेकर क्या कहा?
बैठक में NTA ने भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए कई कदमों की जानकारी भी दी। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने कहा कि पेपर सेटिंग और वितरण प्रणाली में भरोसेमंद और सत्यापित लोगों को शामिल करने पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा NEET परीक्षा को भविष्य में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित करने पर भी गंभीर विचार किया जा रहा है। एजेंसी का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली से पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है।
छात्रों और अभिभावकों की चिंता बरकरार
NEET विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी जरूरी हैं। फिलहाल पूरे मामले में CBI जांच जारी है और संसदीय समिति की चर्चा के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
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