NEET आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन जंतर-मंतर की कहानी अभी बाकी है! संसद में टकराव, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और E20 पेट्रोल विरोध... क्या अब शुरू होगा देश का अगला बड़ा आंदोलन? जानिए उस गुप्त विरोध की इनसाइड स्टोरी।
नई दिल्ली: एक महीने से सुलग रहा दिल्ली का जंतर-मंतर भले ही शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन वापसी के बाद शांत हो गया हो, लेकिन असली तूफान अभी आना बाकी है। वीकेंड की छुट्टी के बाद आज जब संसद की कार्यवाही शुरू होगी, तो माहौल बेहद हंगामेदार और टकराव से भरा होने की उम्मीद है। विपक्ष NEET-UG 2026 पेपर लीक, छात्रों पर हुई पुलिसिया बर्बरता और सरकार की घेराबंदी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर की जो तस्वीरें सामने आईं, उसने देश की एक अलग ही हकीकत बयां की है।
आंदोलन का चक्रव्यूह: जब छात्र आंदोलन बन गया शिकायतों का 'कथा-मंच'
शुरुआत में जंतर-मंतर सिर्फ NEET परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों की आवाज था, लेकिन धीरे-धीरे यह जगह एक ऐसे राष्ट्रीय नोटिस-बोर्ड में तब्दील हो गई, जहाँ हर पीड़ित अपनी गुहार लेकर पहुंच रहा था। यहां हर कुछ मीटर पर मांगें और नारे पूरी तरह बदल रहे थे।
- एक 14 साल के बच्चे की अनोखी गुहार: पटपड़गंज से आए 8वीं क्लास के एक छात्र ने चौंकाने वाला बयान दिया। उसका नीट लीक या CJP से कोई लेना-देना नहीं था, वह तो बस इसलिए आया था क्योंकि उसका स्कूल उसे पढ़ाई के लिए बहुत परेशान करता था!
- पेंशन की तलाश में भटकी आंखें: मध्य प्रदेश से अकेले दिल्ली आए 38 वर्षीय नेत्रहीन पुरुषोत्तम पुरी की कहानी ने सबका दिल दहला दिया। पिछले 3 महीनों से बंद पड़ी अपनी मासिक पेंशन को फिर से शुरू कराने की आस में वे इस भीड़ का हिस्सा बने थे, क्योंकि उन्हें यकीन था कि यही वह जगह है जहाँ सरकार उनकी बात सुनेगी।
लाल टोपियां और सेवा दल: छात्र आंदोलन में सियासी तड़का
इस छात्र आंदोलन की सफलता को देखते हुए विपक्षी पार्टियों ने भी केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। जंतर-मंतर का मैदान राजनीतिक पैंतरेबाज़ी का अखाड़ा बन चुका था।
- कन्नौज से आए 200 कार्यकर्ता: अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज से समाजवादी पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता अपनी पहचान बन चुकी लाल टोपी पहनकर प्रदर्शन स्थल पर डटे थे, जिनका साफ कहना था कि इस सरकार को जाना ही होगा।
- कोच्चि से आया सेवा दल: मुख्य मंच के पीछे कांग्रेस के 'सेवा दल' के कार्यकर्ता खाना परोसने और कचरा उठाने में मदद कर रहे थे। एक कार्यकर्ता ने बताया कि कोच्चि से आकर वे इस आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं, क्योंकि राहुल गांधी ने खुद 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाई थी।
महिलाओं का हुंकार: "हमें चाहिए 33% राजनीतिक आरक्षण!"
टॉल्स्टॉय मार्ग के पास का नजारा और भी हैरान करने वाला था। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI) की महिला शाखा, 'नेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन विमेन' (NFIW) की 54 वर्षीय महिला सदस्य के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं प्लेकार्ड लेकर खड़ी थीं।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग: उनका कहना था कि छात्रों का समर्थन जरूरी है, लेकिन संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का मुद्दा उठाना भी उतना ही अहम है।
- महिला संगठनों का जमावड़ा: YWCA इंडिया और AIDWA जैसे संगठनों ने लगभग 500 लोगों को इकट्ठा कर जंतर-मंतर के मंच का इस्तेमाल महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक समानता की गूंज बुलंद करने के लिए किया।
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अगला महा-विस्फोट: क्या अब नितिन गडकरी और हरदीप पुरी होंगे निशाना?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है और CJP का मंच हट चुका है, लेकिन जंतर-मंतर पर एक नई और बेहद खतरनाक चिंगारी सुलग रही है, जो सरकार की अगली सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है। यह मुद्दा छात्रों के भविष्य का नहीं, बल्कि वाहनों के ईंधन से जुड़ा है।
- 'E20 जनता पार्टी' का उदय: केंद्र सरकार के 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) बेचने के अनिवार्य नियम के खिलाफ भारी जनाक्रोश पनप रहा है। ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों का दावा है कि इस ईंधन से उनके वाहन खराब हो रहे हैं और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। CJP की तर्ज पर अब 'E20 जनता पार्टी' नाम का व्यंग्यात्मक ग्रुप खड़ा हो गया है, जो ग्राहकों के लिए 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी व पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
- 31 जुलाई को 'गाड़ी मार्च': उद्यमी तहसीन पूनावाला की अगुवाई वाली 'टीम भारत' ने 31 जुलाई को नई दिल्ली में एक बड़े 'गाड़ी मार्च' का एलान कर दिया है। इसके तुरंत बाद, 4 अगस्त को दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने संसद मार्च की घोषणा की है, जो इस पॉलिसी की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
आज भले ही जंतर-मंतर पर सन्नाटा हो, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान से पहले की शांति जैसा है। देखना होगा कि क्या विपक्ष संसद के भीतर इस अशांति को सरकार के लिए एक नए चक्रव्यूह में बदल पाता है या नहीं!
राजनीतिक दलों ने क्यों दिखाई बढ़ती दिलचस्पी?
जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में नजर आए।
विपक्ष की सक्रियता
- कांग्रेस सेवा दल के स्वयंसेवक आंदोलन में शामिल हुए।
- समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश से पहुंचे।
- विभिन्न विपक्षी नेताओं ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
- संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी शुरू हुई।
- इससे आंदोलन केवल छात्र आंदोलन न रहकर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बन गया।
संसद में आज किन मुद्दों पर हो सकता है टकराव?
वीकेंड की छुट्टी के बाद संसद में कई संवेदनशील मुद्दे गूंज सकते हैं।
संभावित मुद्दे
- NEET पेपर लीक विवाद।
- दिल्ली पुलिस की कार्रवाई।
- नकल-रोधी कानून में संशोधन।
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- छात्र आंदोलन और शिक्षा सुधार।
- विपक्ष की जवाबदेही और सरकार की रणनीति।
क्या जंतर-मंतर अब हर असंतोष की नई राजधानी बन चुका है?
पिछले कुछ सप्ताह की घटनाओं ने यह संकेत दिया कि जंतर-मंतर अब केवल किसी एक आंदोलन का स्थल नहीं रह गया है। छात्र, महिलाएं, दिव्यांग, राजनीतिक कार्यकर्ता, ट्रांसपोर्ट संगठन और सामाजिक समूह-सभी ने इसे अपनी आवाज उठाने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। अब जब छात्र आंदोलन समाप्त हो चुका है, निगाहें इस बात पर हैं कि क्या E20 पेट्रोल का विवाद अगला बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन बन पाएगा, या फिर कोई नया मुद्दा देश की राजनीति और सड़कों दोनों पर नई बहस को जन्म देगा।
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