सिंधु जल संधि पर सर्जिकल स्ट्राइक और 'ऑपरेशन सिंदूर' का खौफ! 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया निर्णायक कदम! आतंकवाद और पाकिस्तान को लेकर क्या है भारत का बड़ा संदेश? जानिए राष्ट्रपति के संबोधन का सच!

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, सिंधु जल संधि, युवाओं और सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था समेत कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि (IWT) को रोकने के भारत के फैसले को निर्णायक कदम बताया। राष्ट्रपति ने इस फैसले को देश और खासकर किसानों के हित से जोड़ते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ संधि को रोकना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इसके साथ ही उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और सटीक कार्रवाई की क्षमता की भी सराहना की।

सिंधु जल संधि पर राष्ट्रपति का बड़ा संदेश, आखिर क्यों बताया निर्णायक कदम?

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना भारत और विशेष रूप से किसानों के हित में निर्णायक कदम है। भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। भारत का कहना रहा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि को रोककर रखा जाएगा। यह मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों में पहले से ही बेहद संवेदनशील रहा है। राष्ट्रपति के बयान ने एक बार फिर साफ कर दिया कि भारत इसे केवल जल-साझेदारी के मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के संदर्भ में भी देख रहा है।

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र, सेना को लेकर क्या बोलीं राष्ट्रपति?

सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को नमन करते हुए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ का जिक्र किया:

  • सटीक प्रहार और अदम्य साहस: 7 मई को शुरू हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल पूरे होने पर उन्होंने भारतीय सेना की सटीकता और शौर्य को याद किया।
  • अप्रैल 2025 का पहलगाम हमला: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले (जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी) के जवाब में भारत ने यह कड़ा रुख अपनाया था।
  • आतंकियों को सीधी चेतावनी: इस ऑपरेशन ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपने दुश्मनों को ढूंढकर उनका खात्मा करने में पूरी तरह सक्षम है, चाहे वे कहीं भी छिपे हों।

NEET-UG और परीक्षा धांधली पर बड़ी बात: शिक्षा मंत्रालय में इस्तीफे के बाद क्या बोले राष्ट्रपति?

देश के युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने हालिया विवादों और परीक्षा प्रणाली में हो रहे बदलावों पर अपनी बात रखी:

  • 65% युवा आबादी भारत की ताकत: उन्होंने कहा कि देश की 35 साल से कम उम्र की 65 प्रतिशत आबादी हमारी सबसे कीमती संपत्ति और भविष्य की निर्माता है।
  • पेपर लीक और कड़े सुधार: जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक विरोध प्रदर्शन (जिसके कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था) की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने और प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से युवा भविष्य तक-राष्ट्रपति के संदेश में क्या था संकेत?

राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन में एक तरफ आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और सिंधु जल संधि जैसे रणनीतिक मुद्दे प्रमुख रहे, तो दूसरी तरफ युवाओं, छात्रों और परीक्षा सुधारों पर भी विशेष जोर दिया गया। सिंधु जल संधि को रोकने के फैसले को निर्णायक बताकर राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के बीच संबंध को रेखांकित किया। वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख भारतीय सेना की कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ देश के सख्त रुख का संकेत रहा। दूसरी ओर, युवाओं और परीक्षा व्यवस्था पर जोर देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि मजबूत भारत की नींव केवल सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता से नहीं, बल्कि विश्वसनीय संस्थानों और सुरक्षित भविष्य पाने वाले युवाओं से भी तैयार होगी।

पाकिस्तान का वैश्विक झूठ बेनकाब: पानी की लड़ाई पर भारत का रुख अडिग!

भारत द्वारा सिंधु जल संधि रोके जाने के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दुष्प्रचार कर रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक पड़ोसी देश सीमा-पार आतंकवाद को पनाह देना और समर्थन करना बंद नहीं करता, तब तक जल संधि पर भारत का रुख सख्त और अपरिवर्तनीय रहेगा। राष्ट्रपति का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और देश के सामने सुरक्षा, आतंकवाद, जल संसाधन और युवा आकांक्षाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल एक साथ मौजूद हैं।