क्या आप रेलवे स्टेशन पर साफ पानी पी रहे हैं? CAG ऑडिट में कई जगह E. coli और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले। 512 स्टेशनों की जांच में 458 पर जरूरी यात्री सुविधाएं भी अधूरी मिलीं।

नई दिल्ली: संसद में 12 अगस्त को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट - 'भारतीय रेलवे में नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता' - ने देश भर के रेल यात्रियों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2019-20 से 2023-24 के बीच किए गए ऑडिट में पाया गया कि रेलवे बोर्ड के कड़े दिशानिर्देशों के बावजूद ज़ोनल रेलवे प्रशासन स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं और स्वच्छता सुनिश्चित करने में बुरी तरह विफल रहा। सबसे भयावह स्थिति पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आई है।

वॉटर कूलर के पानी में मिला E. coli, कहां-कहां सामने आई समस्या?

रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। ऑडिट में 512 नॉन-सबअर्बन ग्रेड स्टेशनों का अध्ययन किया गया, जिनमें से कई बड़े स्टेशनों के वॉटर कूलर और प्लेटफॉर्म नलों से लिए गए पानी के सैंपल में खतरनाक E. coli और 'टोटल कोलीफॉर्म' बैक्टीरिया पाए गए।

प्रभावित प्रमुख स्टेशन:

  • सदर्न रेलवे (SR): कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन।
  • साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR): हैदराबाद।
  • सेंट्रल रेलवे (CR): छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला।
  • ईस्टर्न रेलवे (ER): मधुपुर।

इसके अलावा, छह ज़ोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का कोई बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण ही नहीं किया गया, जिससे लाखों यात्रियों की सेहत खतरे में पड़ गई।

89% स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं (MEA) की कमी

CAG ने पाया कि रेलवे बोर्ड द्वारा 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर न्यूनतम ज़रूरी सुविधाएं (MEA) पूरी करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, चुने गए 512 स्टेशनों में से 458 स्टेशनों (89% से अधिक) में पीने का पानी, शौचालय, यूरिनल, शेल्टर, पंखे और बैठने की व्यवस्था या तो गायब थी या मानक से बेहद कम पाई गई।

NSG-1 कैटेगिरी के वीआईपी स्टेशन भी बदहाल

हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित NSG-1 कैटेगिरी के स्टेशनों - जैसे नई दिल्ली, CSMT, हावड़ा, सियालदह और मुंबई सेंट्रल - में भी यात्रियों की मुख्य सुविधाओं में भारी कमियां पाई गईं। 'पैसेंजर एमेनिटीज़ मैनेजमेंट सिस्टम' के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों, 403 स्टेशनों पर यूरिनल और 201 स्टेशनों पर शौचालयों की सीधी कमी दर्ज की गई। CAG ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी देते हुए 'यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल' के तहत पानी की नियमित जांच और स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन करने की सिफारिश की है।

हजारों स्टेशनों पर पानी और शौचालय से जुड़ी कमी

CAG की रिपोर्ट में यात्री सुविधा प्रबंधन प्रणाली की जांच के दौरान भी बड़ी संख्या में कमियां सामने आईं। MEA मानकों के मुताबिक 201 स्टेशनों पर शौचालय, 403 स्टेशनों पर यूरिनल और 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी पाई गई। यह आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारतीय रेलवे के नॉन-अर्बन नेटवर्क पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री निर्भर हैं। रिपोर्ट के अनुसार NSG श्रेणी के तहत 5,908 रेलवे स्टेशन हैं और 2023-24 में रेलवे ने 292.4 करोड़ नॉन-अर्बन यात्रियों को यात्रा कराई।

अब रेलवे को क्या करना होगा?

CAG ने रेलवे से पानी की सप्लाई व्यवस्था की जांच और पीने के पानी की गुणवत्ता की व्यापक जांच के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। इसमें Uniform Drinking Water Quality Protocol के तहत सभी निर्धारित पैरामीटर की जांच शामिल है। रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि यात्रियों के लिए केवल स्टेशन पर वॉटर कूलर या नल लगाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि उनमें आने वाला पानी लगातार निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।