अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से 8 कर्मचारियों ने करोड़ों की चोरी की। SIT जांच में करीब 7.5 करोड़ रुपये की लूट का खुलासा हुआ है। 8 आरोपी गिरफ्तार हैं और उनसे नकदी व संपत्ति जब्त की गई है।

लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 साल पुराना सपना था। जब 22 जनवरी 2024 को यह सपना साकार हुआ, तो करोड़ों रामभक्तों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। देश के कोने-कोने से लोग अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर रहे थे। लेकिन मंदिर के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर के दानपात्र पर ही कुछ कर्मचारियों ने हाथ साफ कर दिया। इस घटना से रामभक्तों की आस्था को गहरी चोट लगी है। हम अच्छे शासन के लिए 'रामराज्य' का उदाहरण देते हैं, लेकिन खुद राम की नगरी में हुई इस चोरी ने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है।

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यह कोई एक-दो बार की चोरी नहीं है। 27 अप्रैल से 5 जून के बीच, यानी सिर्फ 42 दिनों में, 8 आरोपियों ने 70 से भी ज़्यादा बार दानपात्र से पैसे उड़ाए। मामला बड़ा होने पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच SIT को सौंप दी और 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय अदालत ने आरोपियों को 13 जुलाई तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। SIT ने आरोपियों से 80 लाख रुपये कैश, 1 कार और 3 आईफोन जब्त किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, दानपात्र से करीब 7.5 करोड़ रुपये की लूट हुई है।

 राम मंदिर दान चोरी का मामला कैसे सामने आया?

7 जून: समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर में 5 से 7.5 करोड़ रुपये की लूट हुई है।

8 जून: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लूट का गंभीर आरोप लगाया।

9 जून: बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर CBI और ED से जांच कराने की मांग की।

10 जून: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर में हुए कथित घोटाले पर रिपोर्ट मांगी।

11 जून: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने दान चोरी के आरोपों को झूठा बताया।

12 जून: बैंक खाते के पूर्व प्रभारी महिपाल सिंह ने भी दान में लूट का आरोप लगाया।

13 जून: उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए 3 अधिकारियों की SIT बनाई।

24 जून: SIT अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार को 150 पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट सौंपी।

25 जून: घोटाले को लेकर पहली FIR दर्ज हुई। मंदिर में काम करने वाले 8 कर्मचारी गिरफ्तार हुए।

26 जून: ट्रस्टी चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया।

ये हैं अयोध्या के सम्मान की धज्जियां उड़ाने 8 आरोपी

1. राम शंकर यादव उर्फ टिंकू यादव: यह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व कार ड्राइवर था। यह कैश गिनने का इंचार्ज था और दान पेटियों को लाने-ले जाने का काम करता था।

ड्राइवर अब 50 करोड़ की संपत्ति का मालिक!

टिंकू यादव पहले ऑटो चलाता था। बाद में वह राम मंदिर जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर बन गया। ड्राइवर की नौकरी छोड़ने के बाद उसने अयोध्या एयरपोर्ट के पास 50 करोड़ रुपये का 10 कमरों वाला गेस्ट हाउस बना लिया। 3 रेस्टोरेंट में उसकी पार्टनरशिप है, लखनऊ में एक घर है और एक फॉर्च्यूनर कार भी है।

2. राम शंकर मिश्रा: राम मंदिर के दानपात्र का कैश गिनने वाला कर्मचारी।

3. अनुकल्प मिश्रा: राम शंकर मिश्रा का बेटा और कैश गिनने वाला कर्मचारी।

20 हजार की सैलरी वाले के पास नोएडा में फ्लैट

सिर्फ 20,000 रुपये की सैलरी पाने वाले इस शख्स ने नोएडा में 65 लाख रुपये का फ्लैट खरीद लिया। उसके गांव में एक करोड़ की लागत से एक फार्म हाउस भी बन रहा है। उसके पास एक गाड़ी है और वह एक नई स्कॉर्पियो SUV बुक करने वाला था।

4. लव कुश मिश्रा: राम शंकर मिश्रा का दामाद और कैश गिनने वाला स्टाफ।

₹15000 सैलरी, पर बना रहा ₹25 लाख का घर

मंदिर में उसकी सैलरी 12-15 हजार रुपये थी। उसने अयोध्या-लखनऊ हाईवे के पास अपनी पत्नी के नाम पर 8.8 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा और उस पर घर बनवा रहा है। आज उस घर की कीमत करीब 25 लाख रुपये है। SIT के छापे में उसके घर से 12 लाख रुपये कैश मिला। उसने 1 लाख रुपये से ज़्यादा की बाइक भी खरीदी थी।

5. अविनाश शुक्ला: राम मंदिर का परिचारक (अटेंडेंट)।

इसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये समेत कुल 58 लाख रुपये जब्त किए गए।

6. मनीष यादव: कैश गिनने वाला कर्मचारी।

इसके बैंक खाते से 36 लाख रुपये जब्त हुए।

7. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: बैंक का पूर्व कर्मचारी और कैश काउंटिंग स्टाफ का इंचार्ज।

8. करुणेश पांडे: यह ट्रस्ट के नाम पर फर्जी रसीदें देकर पैसे लेता था। यह फर्जी रसीदें बनाकर भक्तों से दान में मिले सोने-चांदी के गहने भी चुराता था।

कैश गिनने के काम पर थे 50 लोग

अयोध्या राम मंदिर में दान का पैसा गिनने के लिए 50 लोग तैनात थे। इनमें से 24 कर्मचारी गिने हुए नोटों के बंडल बनाते थे। 12 लोग उनकी निगरानी करते थे। 14 लोग SBI और एक प्राइवेट कंपनी के ऑडिटर थे।

इन तरीकों से होती थी राम के धन की लूट

- कैश गिनने वाली जगह पर आते-जाते वक्त कर्मचारियों की कोई चेकिंग नहीं होती थी।

- एक कर्मचारी CCTV कैमरे के आगे खड़ा हो जाता था, ताकि कैमरा ब्लॉक हो जाए। बाकी लोग अपनी पैंट और शर्ट की जेबों में नोट भर लेते थे।

- चोरी किए गए पैसे को वे टॉयलेट में छिपा देते थे। काम खत्म होने के बाद उसे घर ले जाकर आपस में बांट लेते थे।

- नोट गिनते समय बंडल में कुछ ज़्यादा नोट डालकर गड्डी बनाते थे। जब पैसा बैंक में जमा करने ले जाते, तो रास्ते में वे अतिरिक्त नोट निकाल लेते थे।

- इसके अलावा, मंदिर में दान आए सोने-चांदी के गहनों और मूर्तियों के भी गायब होने के आरोप हैं।

ये लोग कर्मचारी बने कैसे?

ट्रस्ट ने दान गिनने की जिम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दी थी। SBI ने यह काम आउटसोर्सिंग के आधार पर एक प्राइवेट एजेंसी को दे दिया था। कई बड़े लोगों की सिफारिश पर ये आरोपी उस एजेंसी में भर्ती हुए थे।