गुजरात के कच्छ में 10 साल बाद जन्मे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे की कड़ी सुरक्षा की जा रही है। 50 वन अधिकारियों की टीम 24 घंटे निगरानी कर रही है। यह चूजा 'जंपस्टार्ट' तकनीक के तहत राजस्थान से लाए गए अंडे से जन्मा है।

अहमदाबाद: गुजरात में वन विभाग की पूरी टीम एक नन्हे से पक्षी के बच्चे को बचाने के लिए दिन-रात एक किए हुए है। यह कोई मामूली बच्चा नहीं, बल्कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का चूजा है, जो कच्छ के अब्दासा घास के मैदानों में पूरे दस साल बाद कुदरती तौर पर पैदा हुआ है। इस चूजे को ऐसी वीवीआईपी सुरक्षा दी गई है कि सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।

सिर्फ 150 ग्राम के इस बच्चे की हिफाजत के लिए करीब 50 वन विभाग के अधिकारी 'बेबी सिटर' बनकर दिन-रात पहरा दे रहे हैं। तीन शिफ्टों में यह स्पेशल टीम चूजे और उसकी मां की हर हरकत पर नजर रखती है। इस चूजे का जन्म 26 मार्च को हुआ था। खास बात यह है कि यहां दशकों बाद इस पक्षी का कोई बच्चा पैदा हुआ है।

दुनिया में बहुत कम बची इस पक्षी की प्रजाति को बचाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलाके में खास वॉच टावर बनाए गए हैं, जिन पर दूरबीन और स्पॉटिंग स्कोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, चूजे को जंगली कुत्तों और दूसरे जानवरों से खतरा हो सकता है, इसलिए आसपास की कच्ची सड़कों को बंद कर दिया गया है और बाड़ को भी मजबूत किया गया है। यहां तक कि जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए पास के तालाबों को भी सुखा दिया गया है।

इस चूजे का जन्म 'जंपस्टार्ट' (Jumpstart) नाम की एक नई संरक्षण तकनीक से हुआ है। इसके लिए राजस्थान से एक अंडा लाकर गुजरात में एक मादा पक्षी के घोंसले में रखा गया था, जिसने उसे सेया। यह पूरा मिशन वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट्स की देखरेख में चल रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक यह चूजा उड़ने लायक नहीं हो जाता, तब तक यह कड़ी सुरक्षा जारी रहेगी। इस पूरे काम पर करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है।