RBI Repo Rate Hike 2026 : भारतीय रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया यानि आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दी है। रेपो रेट बढ़ने से अब बैंक से लोन लेना महंगा हो जाएगा। ऐसे में सबसे बड़ी टेंशन उन लोगों को हो रही है, जो दीवाली-धनतेरस पर नया घर और नई कार खरीदने का प्लाना बना रहे हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे में आम आदमी को क्या करना चाहिए...

दिल्ली. फेस्टिवल सीजन में घर या नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद आपके लिए लोन का हिसाब थोड़ा बदल सकता है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। इसका असर आगे चलकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

अब सवाल है कि अगर फेस्टिवल में आपको घर या कार पर अच्छा ऑफर मिल रहा है तो क्या खरीदारी टाल देनी चाहिए? इसका जवाब सिर्फ रेपो रेट देखकर नहीं दिया जा सकता। आपको ऑफर, लोन की ब्याज दर, EMI और कुल भुगतान चारों चीजों का हिसाब देखना चाहिए।

पहले समझिए Repo Rate बढ़ने का मतलब क्या है

  • Repo Rate वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है। इसका असर बैंक की लोन ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
  • लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि RBI ने 0.25% रेपो रेट बढ़ाया तो आपकी EMI भी सीधे 0.25% बढ़ जाएगी। आपकी EMI पर असर बैंक की नई ब्याज दर, लोन की रकम और बची हुई अवधि पर निर्भर करेगा।

घर खरीदने का प्लान है तो क्या करें?

  • मान लीजिए आप 20 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेते हैं और ब्याज दर 8.50% है। इस स्थिति में EMI करीब ₹17,356 महीने होगी।
  • अगर ब्याज दर बढ़कर 8.75% हो जाती है तो इसी लोन की EMI करीब ₹17,674 हो सकती है।

यानी अंतर करीब ₹318 प्रति महीने का है।

  • लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। अगर आपको फेस्टिवल ऑफर में घर की कीमत पर बड़ी छूट मिल रही है, प्रोसेसिंग फीस कम हो रही है या डाउन पेमेंट पर कोई फायदा मिल रहा है, तो सिर्फ EMI देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।

खरीदने से पहले समझिए

  • मान लीजिए किसी घर पर फेस्टिवल ऑफर में आपको ₹1 लाख की सीधी छूट मिल रही है। दूसरी तरफ ब्याज दर बढ़ने से आपकी EMI कुछ सौ रुपये बढ़ रही है।
  • ऐसे में यह देखना जरूरी है कि लोन की पूरी अवधि में अतिरिक्त ब्याज कितना देना पड़ेगा और ऑफर से आपको कितनी बचत हो रही है।
  • अगर ऑफर की बचत बड़ी है तो बढ़ी हुई ब्याज दर के बावजूद खरीदारी का फैसला आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

कार खरीदने वालों के लिए क्या गणित है?

  • मान लीजिए आप ₹7 लाख का कार लोन 5 साल के लिए लेते हैं। 9% ब्याज दर पर EMI करीब ₹14,531 होगी।
  • अगर ब्याज दर 9.25% हो जाती है तो EMI करीब ₹14,616 हो सकती है।

यानी EMI में करीब ₹85 महीने का अंतर आएगा।

  • अब अगर फेस्टिवल ऑफर में कार कंपनी या डीलर आपको ₹50 हजार की छूट, एक्सचेंज बोनस या दूसरी बचत दे रहा है तो सिर्फ ब्याज बढ़ने के कारण खरीदारी रोकना जरूरी नहीं है। आपको ऑफर की कुल बचत और लोन की अतिरिक्त लागत की तुलना करनी चाहिए।

बेस्ट ऑफर मिले तो तुरंत क्या करें?

  • फेस्टिवल सीजन में डीलर कई तरह के ऑफर देते हैं। इनमें कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, एक्सेसरीज, कम प्रोसेसिंग फीस और कुछ मामलों में ब्याज पर विशेष ऑफर शामिल हो सकते हैं।

लेकिन ऑफर देखकर तुरंत बुकिंग न करें। पहले ये 5 चीजें जरूर चेक करें:

1. कैश डिस्काउंट कितना है? सिर्फ 'बड़ा ऑफर' देखकर खुश न हों। वास्तविक छूट कितनी मिल रही है, यह देखें।

2. लोन की ब्याज दर कितनी है? डीलर द्वारा बताई गई EMI के बजाय बैंक की वास्तविक ब्याज दर पूछें।

3. कुल कितना पैसा देना होगा? EMI कम होने का मतलब हमेशा लोन सस्ता होना नहीं है। पूरी अवधि में कितना भुगतान होगा, यह देखें।

4. प्रोसेसिंग और दूसरे चार्ज कितने हैं? कम ब्याज के साथ ज्यादा फीस हो सकती है। इसलिए सभी चार्ज जोड़कर तुलना करें।

5. ऑफर की शर्तें क्या हैं? कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस या कम ब्याज वाला ऑफर किन शर्तों पर मिल रहा है, यह जरूर पढ़ें।

आम आदमी के लिए सीधी बात

  • RBI का रेपो रेट बढ़ना अपने आप में यह संकेत नहीं है कि 'अभी घर या कार बिल्कुल मत खरीदो'। इसी तरह सिर्फ फेस्टिवल ऑफर देखकर तुरंत खरीदना भी सही तरीका नहीं है।
  • अगर जरूरत है, बजट मजबूत है और ऑफर वास्तव में अच्छा है तो लोन की ब्याज दर और कुल भुगतान का हिसाब लगाकर खरीद सकते हैं।
  • वहीं अगर खरीदारी सिर्फ ऑफर देखकर करने जा रहे हैं और EMI आपके बजट पर भारी पड़ सकती है, तो इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
  • सबसे सही फैसला वही है जिसमें फेस्टिवल ऑफर की बचत, ब्याज की लागत और आपकी EMI—तीनों आपके बजट में फिट बैठें।