दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को NOC दी है। इसके तहत केवल 500 लोगों को शाम 4 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति है।

Reservation Hatao Andolan: दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस कार्यालय से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, पुलिस ने राजधानी के रामलीला मैदान में ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था के नजरिए से उसे इस प्रदर्शन पर कोई आपत्ति नहीं है।

कितने लोगों को प्रदर्शन की अनुमति?

दिल्ली पुलिस की ओर से जारी NOC के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर अधिकतम 500 लोग इकट्ठा हो सकते हैं। प्रदर्शन को शाम 4 बजे तक की अनुमति दी गई है। इस अनुमति के बाद अब आंदोलन से जुड़े लोग रामलीला मैदान में निर्धारित शर्तों के तहत प्रदर्शन कर सकेंगे।

क्यों जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने से जुड़ी रिपोर्टों का खंडन किया था। पुलिस ने गुरुवार को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर जारी बयान में स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध प्रदर्शन, जुलूस, प्रदर्शन या सभा के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। इससे पहले ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ की ओर से 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

रामलीला मैदान में जगह बदलने पर RHA नाराज

प्रदर्शन का स्थान जंतर-मंतर से रामलीला मैदान किए जाने पर ‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ ने नाराजगी जताई है। RHA ने X पर दावा किया कि उसने जंतर-मंतर के लिए एक महीने पहले ही अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रदर्शन वाले दिन दोपहर 12 बजे अचानक प्रदर्शन की जगह बदलकर रामलीला मैदान कर दी गई। आंदोलन ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 500 तक सीमित कर दी गई है। RHA का आरोप है कि केवल जगह बदलने की बात नहीं है, बल्कि इस तरह उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

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क्या है रिजर्वेशन हटाओ (RHA) आंदोलन?

‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ एक डिजिटल कैंपेन है, जो सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम के जरिए अपनी गतिविधियां चला रहा है। यह सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में लागू जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने या उसमें बड़े बदलाव की मांग करता है। आंदोलन अपने विचारों और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी को मुख्य रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचा रहा है। इस कैंपेन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले विरोध-प्रदर्शन जुटाने के तरीकों को अपनाया है। इंस्टाग्राम पर इस कैंपेन के 56 लाख फॉलोअर्स बताए गए हैं। सोशल मीडिया पर मजबूत मौजूदगी के चलते यह कैंपेन तेजी से चर्चा में आया है।

क्या हैं ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ की मांगें?

  • ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ एकेडमिक एडमिशन और सरकारी नौकरियों में चयन के लिए जातिगत कोटे की जगह मेरिट और टैलेंट को आधार बनाने की वकालत करता है। आंदोलन की ओर से आरक्षण व्यवस्था में बदलाव से जुड़ी कई मांगें और सुझाव सामने रखे गए हैं।
  • कैंपेन के तहत ‘एक देश, एक पहचान’ (One Nation, One Identity) फ्रेमवर्क की बात कही गई है। इसके तहत सार्वजनिक फॉर्म, नौकरी के आवेदन और शैक्षणिक प्रक्रियाओं में जाति से जुड़ी जानकारी बताने या दर्ज करने की जरूरत खत्म करने का प्रस्ताव दिया गया है।
  • ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का सुझाव है कि सरकारी सहायता या सकारात्मक कार्रवाई यानी Affirmative Action का आधार जाति या धर्म के बजाय आर्थिक और अन्य परिस्थितियों को बनाया जाए। इसके तहत आर्थिक स्थिति, विकलांगता, अनाथ होने की स्थिति या शहीद के बच्चे होने जैसे आधारों पर सरकारी सहायता देने की बात कही गई है।