Russia Drone Missile Strike: 450 ड्रोन और 70 मिसाइलों से रूस ने यूक्रेन के पावर ग्रिड पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। NATO प्रमुख की कीव यात्रा और शांति वार्ता से ठीक पहले यह वार क्यों? क्या ठंड, अंधेरा और डर रूस की नई रणनीति है?

Russia Ukraine War: यूक्रेन-रूस युद्ध एक बार फिर डरावने मोड़ पर पहुंच गया है। जब पूरी दुनिया शांति की उम्मीद लगाए बैठी थी, तभी रूस ने यूक्रेन के पावर ग्रिड पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के अनुसार, रूस ने एक ही रात में करीब 450 लंबी दूरी के ड्रोन और 70 मिसाइलें दागीं। इस हमले का सबसे बड़ा निशाना यूक्रेन की बिजली, हीटिंग और पानी की सप्लाई बनी। यह हमला ऐसे वक्त हुआ, जब NATO के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुट्टे समर्थन जताने के लिए कीव पहुंचे थे और अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में होने वाली शांति वार्ता से ठीक एक दिन पहले।

सर्दी में हमला क्यों? क्या आम लोगों को तोड़ना मकसद है?

ज़ेलेंस्की ने साफ कहा कि रूस ने जानबूझकर सर्दियों के सबसे ठंडे दिनों को चुना। कीव में तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, और ऐसे में बिजली व हीटिंग बंद होना आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। उनका आरोप है कि रूस नागरिकों को अंधेरे और ठंड में रखकर उनका हौसला तोड़ना चाहता है।

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पावर ग्रिड पर सीधा वार: कितना बड़ा नुकसान हुआ?

यूक्रेन की सबसे बड़ी निजी बिजली कंपनी DTEK ने बताया कि यह इस साल बिजली नेटवर्क पर हुआ सबसे भारी हमला है। हमले में सबस्टेशन, ट्रांसफार्मर, थर्मल पावर प्लांट और अन्य अहम ढांचों को निशाना बनाया गया। कीव में ही 1,170 अपार्टमेंट इमारतों में हीटिंग बंद हो गई, जबकि कई रिहायशी इलाकों, एक किंडरगार्टन और गैस स्टेशन में आग लग गई।

कितने लोग घायल हुए? कौन-कौन से इलाके प्रभावित हुए?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं। कीव के अलावा खार्किव और ओडेसा जैसे इलाकों पर भी हमले हुए। इतना ही नहीं, कीव में स्थित नेशनल वर्ल्ड वॉर-II म्यूज़ियम को भी नुकसान पहुंचा, जिसे यूक्रेन ने “प्रतीकात्मक और निंदनीय हमला” बताया।

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NATO और अमेरिका की भूमिका क्या होगी?

मार्क रुट्टे ने यूक्रेनी संसद में कहा कि NATO देश यूक्रेन के साथ खड़े हैं और आगे भी मदद जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि NATO सदस्य यूक्रेन की एयर डिफेंस में इस्तेमाल होने वाली 90% मिसाइलें दे चुके हैं। वहीं, अमेरिका की कोशिशों के बावजूद अब तक शांति वार्ता से कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा।

क्या शांति वार्ता से पहले दबाव बनाना चाहता है रूस?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। सवाल यह है कि क्या रूस बातचीत से पहले अपनी ताकत दिखाकर शर्तें मनवाना चाहता है, या फिर यह युद्ध और लंबा चलने वाला है? यूक्रेन इस वक्त सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि अंधेरे, ठंड और अनिश्चितता के भविष्य से भी जूझ रहा है।