Air Marshal on Flights: दुबई-तेल अवीव flydubai फ्लाइट में कॉकपिट विवाद के बाद विमान सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में जानिए भारत की संवेदनशील उड़ानों में Sky Marshal की तैनाती कैसे होती है, कौन होते हैं ये कमांडो और क्या हर भारतीय फ्लाइट में इनकी मौजूदगी होती है।
Sky Marshal in Indian Airlines: फ्लाइट में सफर करने वाले यात्रियों के लिए विमान की सुरक्षा आमतौर पर कॉकपिट, क्रू और एयरपोर्ट की जांच व्यवस्था तक सीमित नजर आती है। लेकिन कुछ संवेदनशील उड़ानों में एक ऐसी सुरक्षा परत भी होती है, जिसकी मौजूदगी आम यात्रियों को पता तक नहीं चलती। इसे Sky Marshal कहा जाता है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही flydubai की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के अंदर हुए विवाद और अचानक आपात स्थिति के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि विमान के भीतर यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।
दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में क्या हुआ?
30 सितंबर को FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच गंभीर विवाद हुआ। विमान ने पहले सामान्य आपात स्थिति का संकेत देने वाला 7700 कोड और बाद में अवैध हस्तक्षेप से जुड़ा 7500 कोड प्रसारित किया। इसके बाद विमान ने अचानक ऊंचाई खोई और उसे सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ दिया गया।
flydubai ने पुष्टि की कि कॉकपिट में विवाद हुआ था और विमान में मौजूद ड्यूटी पर तैनात क्रू सदस्यों ने विमान को सुरक्षित किया। सभी यात्री और क्रू सुरक्षित बताए गए। घटना की वजह और मकसद की जांच जारी है।
क्या हर भारतीय फ्लाइट में होता है Sky Marshal?
नहीं। भारत में Sky Marshal की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन हर घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ान में इनकी तैनाती नहीं होती। गृह मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG के कमांडो संवेदनशील घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में Sky Marshal के तौर पर तैनात किए जाते हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य विमान में किसी संभावित अपहरण या गंभीर सुरक्षा खतरे की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देना होता है। इनकी तैनाती खतरे के आकलन और सुरक्षा जरूरतों के आधार पर की जाती है।
यात्रियों को क्यों नहीं पता चलता?
Sky Marshal की पहचान और मौजूदगी को जानबूझकर गोपनीय रखा जाता है। वे आम यात्री की तरह विमान में सफर कर सकते हैं, ताकि किसी संभावित हमलावर को पहले से पता न चले कि विमान में प्रशिक्षित सुरक्षा अधिकारी मौजूद है।
यही वजह है कि सामान्य यात्रियों को यह पता नहीं होता कि उनकी फ्लाइट में Sky Marshal तैनात है या नहीं। इस व्यवस्था का मकसद किसी घटना के दौरान अचानक और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनाए रखना है।
सिर्फ Sky Marshal पर निर्भर नहीं होती विमान की सुरक्षा
विमान की सुरक्षा केवल किसी कमांडो की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती। कॉकपिट की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षित क्रू, एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, यात्रियों की निगरानी, आपातकालीन प्रक्रियाएं और जमीन पर मौजूद सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सुरक्षा की कई परतें तैयार करती हैं। भारत में नागरिक विमानन सुरक्षा के लिए BCAS सुरक्षा मानकों और प्रक्रियाओं की निगरानी करता है।
FZ1073 की घटना भी दिखाती है कि किसी विमान में अचानक पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए कई स्तरों पर तैयार रहना जरूरी है। इस मामले में विमान सुरक्षित रूप से तबुक पहुंचा और यात्रियों को बाद में वैकल्पिक विमान से रवाना किया गया। घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक जांच जारी है।
भारत में Sky Marshal व्यवस्था कितनी पुरानी है?
भारत में NSG कमांडो को Sky Marshal के तौर पर तैनात करने की व्यवस्था कई वर्षों से चली आ रही है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि संवेदनशील घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर NSG कमांडो इस भूमिका में तैनात किए जाते रहे हैं। 2019 की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, उस अवधि में हजारों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को इस व्यवस्था के तहत कवर किया गया था।
इसलिए अगली बार जब आप फ्लाइट में बैठें, तो याद रखें कि विमान की सुरक्षा सिर्फ वह नहीं है जो आपको दिखाई देती है। कई सुरक्षा उपाय पर्दे के पीछे काम करते हैं—और Sky Marshal उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
