कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वंदे मातरम थोपा नहीं जाना चाहिए और राष्ट्रवाद को सबको साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि लोगों को धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से वंदे मातरम न गाने की आजादी होनी चाहिए।
नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वंदे मातरम थोपा नहीं जाना चाहिए और राष्ट्रवाद को सबको साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे एक लेख में वंदे मातरम को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों पर यह प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी का 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के लिए एक बड़ा प्रेरणा स्रोत था। लेकिन बाद में यह विवादों का कारण बन गया। सबको साथ लेकर चलने के लक्ष्य के साथ ही संविधान सभा ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि राष्ट्रगान गाते समय खड़े न होना या साथ में न गाना देशभक्ति की कमी नहीं है। उन्होंने लेख में मांग की है कि यही तरीका वंदे मातरम के मामले में भी अपनाया जाना चाहिए।
भारत में हर किसी को बहुसंख्यक संस्कृति में घुलमिल जाने पर जोर देना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। जो लोग वंदे मातरम गाना चाहते हैं, उन्हें इसकी आजादी है। लेकिन धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से इसे न गाने की भी आजादी होनी चाहिए। उन्होंने लेख में यह भी साफ किया कि उन्हें चुपचाप सम्मान जताने का अधिकार भी मिलना चाहिए।
