एन चंद्रशेखरन के बाद बॉम्बे हाउस का अगला सुल्तान कौन? टीवी नरेंद्रन के नाम की रेस में एंट्री से क्यों मच गया हड़कंप? जानिए टाटा ग्रुप में उत्तराधिकार के पीछे छिपे सबसे बड़े पावर गेम का पूरा सच!
Tata Group Succession: एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में टाटा संस के चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा के बाद भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने, टाटा ग्रुप के मुख्यालय 'बॉम्बे हाउस' में उत्तराधिकारी की तलाश तेज हो गई है। टाटा संस और लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और प्रशासनिक तालमेल के बीच नए नेतृत्व का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। इस दौड़ में जिन शीर्ष नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, 61 वर्षीय टीवी नरेंद्रन का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहा है।
चंद्रशेखरन के बाद कौन? क्यों बढ़ी उत्तराधिकारी की चर्चा
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने टेक्नोलॉजी, एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नए कारोबारों में बड़े निवेश किए। अब उनके बाद आने वाला चेयरमैन केवल एक कारोबारी समूह का प्रमुख नहीं होगा, बल्कि उसे अलग-अलग सेक्टर में फैले विशाल टाटा साम्राज्य की रणनीतिक दिशा भी तय करनी होगी। यही वजह है कि उत्तराधिकारी की तलाश सामान्य नियुक्ति से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच संबंध भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
38 वर्षों का अटूट सफर: कौन हैं टीवी नरेंद्रन?
टीवी नरेंद्रन टाटा इकोसिस्टम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑपरेटिंग एग्जीक्यूटिव्स में से एक माने जाते हैं। NIT त्रिची से इंजीनियरिंग और IIM कलकत्ता से मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद नरेंद्रन 1988 में टाटा स्टील में शामिल हुए थे। लगभग चार दशकों के अपने लंबे करियर में उन्होंने सेल्स, मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय बिजनेस और साउथ-ईस्ट एशिया में कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 2013 में उन्होंने टाटा स्टील के इंडिया ऑपरेशन्स की कमान संभाली और बाद में पूरे ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर बने। एन चंद्रशेखरन (जो TCS और आईटी/सर्विस बैकग्राउंड से आए थे) की तुलना में नरेंद्रन एक विशुद्ध इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग लीडर हैं।
संकटमोचन का ट्रैक रिकॉर्ड: कर्ज और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने का अनुभव
नरेंद्रन के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा उनकी ऑपरेशनल विश्वसनीयता के कारण हो रही है। जब उन्होंने टाटा स्टील की कमान संभाली, तब कंपनी भारी कर्ज, ग्लोबल स्टील मार्केट की अनिश्चितता और महंगे अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों से जूझ रही थी। उनकी लीडरशिप में कंपनी ने न सिर्फ कर्ज कम किया और कैश फ्लो सुधारा, बल्कि ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे जटिल यूरोपीय ऑपरेशन्स की रीस्ट्रक्चरिंग भी मजबूती से की। टाटा संस चेयरमैन के रोल के लिए कैपिटल एलोकेशन, बड़े पैमाने पर लेबर ऑपरेशन्स और ग्लोबल मार्केट की गहरी समझ बेहद जरूरी होती है, जिस सांचे में नरेंद्रन पूरी तरह फिट बैठते हैं।
'टाटा कल्चर' और इंस्टीट्यूशनल तालमेल: क्यों मजबूत है नरेंद्रन का दावा?
2016 में साइरस मिस्त्री विवाद के बाद टाटा ग्रुप ने हमेशा ऐसे नेतृत्व को प्राथमिकता दी है जो ग्रुप के खास 'गवर्नेंस कल्चर' और ट्रस्ट्स के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चल सके। चंद्रशेखरन की तरह नरेंद्रन भी लगभग चार दशकों से टाटा के साथ जुड़े रहे हैं। उनकी यही लंबी निष्ठा और आंतरिक समझ उन्हें एक बेहद मजबूत इंटरनल कैंडिडेट बनाती है।
उत्तराधिकार चुनने का कड़ा नियम और भावी चुनौतियां
टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत नए चेयरमैन का चुनाव पांच सदस्यीय कमेटी करती है, जिसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, सर रतन टाटा ट्रस्ट और टाटा संस बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। हालांकि, नरेंद्रन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। नोएल टाटा और सौरभ अग्रवाल जैसे दिग्गजों के नाम भी चर्चा में हैं। इसके अलावा उम्र सीमा से जुड़े आंतरिक नियम, एयर इंडिया का टर्नअराउंड, सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़े निवेश और TCS की ग्रोथ बनाए रखने जैसी चुनौतियां नए चेयरमैन के इंतजार में खड़ी हैं।
टाटा चेयरमैन का काम CEO से कितना अलग है?
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। टाटा संस का चेयरमैन किसी एक कंपनी का रोजाना का कारोबार चलाने वाला CEO नहीं होता। यह पद रणनीति, पूंजी आवंटन, समूह की दिशा और संस्थागत नेतृत्व से ज्यादा जुड़ा है। इसलिए संभावित उत्तराधिकारी के लिए केवल किसी एक कंपनी का शानदार प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होगा। उसे TCS, Tata Motors, Tata Steel, Air India, Tata Power, Tata Electronics, Tata Capital और रिटेल जैसे अलग-अलग कारोबारों के बीच संतुलन बनाना होगा। यहीं TV नरेंद्रन का लंबा ग्रुप अनुभव उनके पक्ष में जा सकता है।
लेकिन क्या नरेंद्रन ही बनेंगे अगला चेयरमैन?
यहीं कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट है। अभी ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि TV नरेंद्रन का चयन हो चुका है। उत्तराधिकार की चर्चाओं में अन्य नाम भी सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों में नोएल टाटा और सौरभ अग्रवाल जैसे नामों की भी चर्चा हुई है। इसके अलावा टाटा की आंतरिक उत्तराधिकार प्रक्रिया में कई संस्थागत और बोर्ड स्तर के विचार महत्वपूर्ण होंगे। टाटा संस के Articles of Association के तहत चेयरमैन के चयन के लिए एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस बोर्ड और स्वतंत्र सदस्य की भूमिका होती है। इसलिए केवल बाजार में चल रही चर्चा से किसी एक नाम को अगला चेयरमैन मान लेना जल्दबाजी होगी।


