तमिलनाडु के CM विजय के चुनावी वादों पर सालाना ₹1 लाख करोड़ का खर्च आएगा। यह राज्य के टैक्स रेवेन्यू का 50% है, जिससे वित्तीय बोझ और कर्ज बढ़ने की आशंका है। इसके बावजूद, विजय ने पहले ही 3 वादे लागू कर दिए हैं।
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर थलपति विजय ने कुर्सी तो संभाल ली है, लेकिन अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या वो अपने चुनावी वादे पूरे कर पाएंगे? दरअसल, उनके घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को जमीन पर उतारने के लिए हर साल 1 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम की जरूरत होगी।

विजय ने अपनी पार्टी के सत्ता में आने पर महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये, बेरोजगार ग्रेजुएट्स को 4,000 रुपये, डिप्लोमा होल्डर्स को 2,500 रुपये, साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, स्कूली बच्चियों की मांओं को सालाना 15,000 रुपये, शादी करने वाली लड़कियों को 8 ग्राम सोना और रेशम की साड़ी, और हर पैदा होने वाले बच्चे को 1 सोने की अंगूठी देने जैसे कई बड़े वादे किए थे। इनमें से तीन वादों पर उन्होंने पहले दिन ही मुहर लगा दी है। इसमें 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल फोर्स का गठन और पूरे राज्य में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए यूनिट्स की स्थापना शामिल है।
₹1 लाख करोड़ का पड़ेगा बोझ
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर इन सभी वादों को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो राज्य के खजाने पर सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। यह आंकड़ा 2024-25 के लिए राज्य के कुल टैक्स रेवेन्यू (2.1 लाख करोड़ रुपये) का लगभग 50% है। पांच साल की अवधि में इन योजनाओं पर 4.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का खर्च आ सकता है।
अर्थशास्त्रियों ने दी चेतावनी
मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के डायरेक्टर एन.आर. भानुमूर्ति ने चेतावनी देते हुए कहा, 'इन योजनाओं को लागू करने से पहले कुछ कदम उठाना बहुत जरूरी है। सबसे पहले लाभार्थियों की पहचान करनी होगी, मौजूदा योजनाओं का ऑडिट करना होगा और खर्चों को तर्कसंगत बनाना होगा। यह भी देखना होगा कि नई योजनाएं कहीं पुरानी योजनाओं को दोहरा तो नहीं रहीं। अगर खर्चों को नियंत्रित नहीं किया गया तो राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा।'
वहीं, मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व डायरेक्टर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री के. षण्मुगम ने कहा, ‘अंतरिम बजट पहले ही कर्ज की सीमा के भीतर तैयार किया जा चुका है। वित्त आयोग के नियमों के मुताबिक, राज्य का वित्तीय घाटा GSDP का लगभग 3% ही रखा जा सकता है। इसमें ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं है। फिलहाल तमिलनाडु का वित्तीय घाटा 2.8% से 3% के बीच है। ऐसे में ज्यादा खर्च करने की गुंजाइश नहीं है। सिर्फ विजय की कैश वाली योजनाओं के लिए ही सालाना 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा चाहिए होंगे। राज्य के खर्च का एक बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज में चला जाता है। ऐसे में नई योजनाओं से राज्य पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा।’
तमिलनाडु के सीएम का पदभार संभालते ही विजय ने रविवार को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष बल की स्थापना और राज्य भर में ड्रग्स तस्करी रोकने वाली इकाइयों के निर्माण की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। जिन घरों में दो महीने में 500 यूनिट तक बिजली की खपत होती है, उन्हें हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। वहीं, 500 यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वालों के लिए हर दो महीने में 100 यूनिट मुफ्त बिजली की पुरानी योजना जारी रहेगी।
महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए 'सिंगा पेण' (Singa Penn) नाम से एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी। 'सिंगा पेण' का मतलब 'शेरनी' होता है, और यह शब्द आमतौर पर एक बहादुर महिला के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह, तमिलनाडु में नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कुल 65 एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यूनिट्स बनाई जाएंगी। हर जिले में एक यूनिट होगी और बाकी यूनिट्स राज्य के नौ प्रमुख शहरों में स्थापित की जाएंगी।
विजय के कुछ बड़े वादे…
- हर परिवार को ₹25 लाख का स्वास्थ्य बीमा
- नई दुल्हन को 8 ग्राम सोना और रेशम की साड़ी
- हर पैदा होने वाले बच्चे को सोने की अंगूठी
- बेरोजगार ग्रेजुएट्स को हर महीने ₹4,000
- डिप्लोमा होल्डर्स को ₹2,000 की मदद
- युवा उद्यमियों को ₹25 लाख तक का लोन
