ट्विशा शर्मा मौत केस में हर घंटे नया रहस्य सामने आ रहा है। SIT पूछताछ में पति समर्थ सिंह ने अबॉर्शन, 7 लाख रुपये और मानसिक तनाव का दावा किया, जबकि पोस्टमॉर्टम में चोटों के निशान मिले। CBI जांच, दहेज उत्पीड़न आरोप, आखिरी फोन कॉल और भोपाल क्राइम सीन ने इस हाई-प्रोफाइल केस को और सस्पेंसफुल बना दिया है।

भोपाल: देश को झकझोर देने वाले हाई-प्रोफाइल पूर्व एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। वहीं दूसरी तरफ, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में दो घंटे से अधिक समय तक क्राइम सीन को फिर से बनाया (Recreated) और मुख्य आरोपी व पति समर्थ सिंह से मैराथन पूछताछ की।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Scroll to load tweet…

आधी रात का सस्पेंस: गुमराह करने की कोशिश और '7 लाख रुपये' का रहस्य

एसआईटी की पूछताछ के दौरान मामले में कई पेंच सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब आरोपी समर्थ सिंह से उस अवधि के बारे में सवाल किए गए जब वह कथित तौर पर फरार चल रहा था, तो उसने जांचकर्ताओं को बार-बार गुमराह करने का प्रयास किया। हालांकि, समर्थ ने पूछताछ में एक नया दावा जोड़ते हुए कहा कि अबॉर्शन (गर्भपात) के बाद से ही ट्विशा काफी मानसिक तनाव और परेशानी में थी। समर्थ ने यह भी दोहराया कि उसने ट्विशा को 7 लाख रुपये दिए थे। जांच को आगे बढ़ाते हुए एसआईटी ने समर्थ सिंह का लैपटॉप, मोबाइल फोन, पासपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं ताकि उसके दावों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

आखिरी कॉल की खौफनाक दास्तान: 'वह अब इस दुनिया में नहीं रही'

ट्विशा के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत इस मामले में सीधे तौर पर दहेज उत्पीड़न और हत्या की ओर इशारा करती है। परिवार का आरोप है कि 9 दिसंबर, 2025 को हुई शादी के बाद से ही समर्थ और उसकी मां गिरिबाला सिंह (जो भोपाल उपभोक्ता न्यायालय की अध्यक्ष हैं) दिए गए दहेज से खुश नहीं थे। एफआईआर के मुताबिक चौंकाने वाला टाइमलाइन: 12 मई की रात 9:41 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया था। बातचीत के दौरान पीछे से समर्थ के चिल्लाने की आवाज आई और फोन अचानक कट गया। इसके बाद जब परिवार ने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, तो सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाया और सिर्फ इतना कहा, "वह अब इस दुनिया में नहीं रही" और फोन काट दिया। इसके ठीक बाद रात 10:20 बजे समर्थ उसे एम्स (AIIMS) भोपाल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: सिर्फ फांसी नहीं, शरीर पर मिले चोटों के निशान

इस पूरे मामले को जो बात सबसे ज्यादा संदिग्ध बनाती है, वह है ट्विशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट। हालांकि डॉक्टरों ने मौत का प्राथमिक कारण "लिगेचर द्वारा फांसी लगाना" बताया है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी साफ तौर पर दर्ज है कि ट्विशा के शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं। ये चोटें किसी ठोस चीज से लगने के कारण बनी थीं, जो घटना की रात हुई किसी बड़ी हाथापाई या घरेलू हिंसा की तरफ इशारा करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: 'निष्पक्ष जांच होगी, मीडिया से रहें दूर'

इस मामले की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुकी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत एक "निष्पक्ष, स्वतंत्र और तटस्थ जांच" सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वे मीडिया के सामने कोई भी बयानबाजी न करें, ताकि सीबीआई और एसआईटी की चल रही जांच प्रभावित न हो। उधर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को 27 मई तक के लिए टाल दिया है।