क्या 6 सांसदों की बगावत उद्धव ठाकरे की राजनीति के लिए 2022 से भी बड़ा झटका साबित होगी? अगर बागी सांसद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या उद्धव ठाकरे का अध्यक्ष पद छोड़ने का प्रस्ताव पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की रणनीति है या मजबूरी?
मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) एक और बड़ी मुश्किल में फँस गई है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी है, जिससे पार्टी में एक और विभाजन का खतरा मंडराने लगा है। इस बड़ी बगावत के बाद, उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया है कि अगर कार्यकर्ताओं का उन पर से भरोसा उठ गया है, तो वह पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। शिवसेना के स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए उद्धव ने यह भावुक बयान दिया।

उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन सांसदों ने उद्धव ठाकरे की बुलाई संसदीय दल की बैठक का भी बहिष्कार किया। खबरों के मुताबिक, इन बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर खुद को एक अलग ग्रुप के तौर पर मान्यता देने की मांग की है। ऐसी अटकलें हैं कि ये सभी सांसद एकनाथ शिंदे के शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं। इसी उथल-पुथल के बीच उद्धव ने कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक तौर पर कहा, "मैं लड़ाई नहीं छोडूंगा, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस पद के लायक नहीं हूँ, मैं हट जाऊंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी आम कार्यकर्ता को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हैं। सांसदों के पाला बदलने पर उन्होंने उन वोटरों से भी माफी मांगी, जिन्होंने उन्हें वोट दिया था।
उद्धव ठाकरे ने उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि शिवसेना का कांग्रेस में विलय हो सकता है। उन्होंने पूछा, "जब हम 30 साल तक बीजेपी के साथ गठबंधन में रहकर उसमें शामिल नहीं हुए, तो कांग्रेस में कैसे हो सकते हैं?" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस, बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति से बेहतर है।
वहीं, शिवसेना स्थापना दिवस के एक दूसरे कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर जमकर हमला बोला। शिंदे ने आरोप लगाया, "उद्धव ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को धोखा दिया है और कांग्रेस-एनसीपी की गोद में जाकर बैठ गए हैं।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यह तो सिर्फ ट्रेलर है, असली फिल्म तो अभी बाकी है। देखते जाइए आगे क्या होता है।" शिंदे ने 'शेर अकेला आता है' का जिक्र करते हुए दावा किया कि बालासाहेब के असली सपनों को उनका गुट ही पूरा कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन की भी तारीफ की।
साल 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई बड़ी बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है। उद्धव गुट ने व्हिप का उल्लंघन करने वाले बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है।
