UP Government Job Rules के तहत चरित्र सत्यापन सख्त किया गया है। हिंसक सत्ता परिवर्तन गतिविधियों, गंभीर अपराधों और परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधान जानें। पुलिस को 30 दिन में रिपोर्ट देनी होगी, लेकिन केवल FIR से स्वतः अयोग्यता नहीं होगी। जानें पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े नए नियम।
UP Government Job Rules: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले चरित्र सत्यापन (कैरेक्टर वेरिफिकेशन) के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब हिंसक तरीकों से सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने वाले या गंभीर अपराधों में लिप्त उम्मीदवारों को सरकारी सेवा से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए नियम और किसे मिलेगा नुकसान।
किन लोगों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? कड़े हुए नियम
नए नियमों के दायरे में उन उम्मीदवारों को रखा गया है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है या जो देश की व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं।
- हिंसक सत्ता परिवर्तन: जो लोग किसी ऐसे संगठन से जुड़े हैं जिनका घोषित उद्देश्य हिंसा के जरिए मौजूदा व्यवस्था या सत्ता बदलना है, वे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माने जाएंगे। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा या सोच के आधार पर किसी को बाहर नहीं किया जाएगा।
- 3 साल का नियम: यदि कोई व्यक्ति 21 वर्ष की आयु के बाद और जांच से पिछले 3 वर्षों के भीतर ऐसी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे सक्रिय रूप से शामिल माना जाएगा।
पुलिस वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन की समय-सीमा और राहत भरे प्रावधान
सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ ही समय पर पूरा करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
- 30 दिन में पूरी होगी जांच: जिला पुलिस और एलआईयू (LIU) को वेरिफिकेशन रिपोर्ट अब 30 दिनों के भीतर सौंपनी होगी। इसके लिए उम्मीदवारों के घर जाने या उन्हें बार-बार बुलाने की अनिवार्यता नहीं होगी।
- पक्ष रखने का मौका: अगर कोई नेगेटिव रिपोर्ट आती है, तो जिला मजिस्ट्रेट को फाइल भेजने से पहले उम्मीदवार को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा।
- केवल FIR से उम्मीदवारी रद्द नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल FIR दर्ज होने या पेंडिंग मामलों के आधार पर किसी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। कोर्ट के समझौते या जुवेनाइल जस्टिस से जुड़े मामलों में भी राहत दी गई है।
सत्ता परिवर्तन की गतिविधियों पर क्या है प्रावधान?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक मान्यताओं या विचारधारा के कारण किसी उम्मीदवार को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर कोई व्यक्ति ऐसे संगठन से जुड़ा पाया जाता है, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था बदलना है, तो उसकी उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है।
- 21 साल की उम्र के बाद और जांच की तारीख से पिछले तीन साल के दौरान ऐसी गतिविधियों में शामिल होना प्रासंगिक माना जा सकता है।
- इस अवधि में सक्रियता मिलने पर उम्मीदवार की पात्रता पर सवाल उठ सकता है।
- उसके व्यवहार और विचारों में बदलाव के ठोस सबूत भी देखे जा सकते हैं।
UP Govt Jobs: किन अपराधों में अटक सकती है नियुक्ति?
- संशोधित ढांचे में हत्या, डकैती, बलात्कार, महिलाओं की गरिमा से जुड़े अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवादी गतिविधियों जैसे गंभीर मामलों का उल्लेख है। परीक्षा में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, डमी उम्मीदवार और फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े मामले भी इसमें शामिल हैं। डिजिटल अरेस्ट, UPI धोखाधड़ी और कुछ अन्य साइबर व संगठित अपराधों को लेकर भी रिपोर्टों में प्रावधानों का जिक्र किया गया है।
- हालांकि, केवल FIR या लंबित जांच से उम्मीदवार अपने आप अयोग्य नहीं हो जाता। आपसी समझौते से निपटे मामलों और किशोर न्याय कानून के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक चयनित पुलिस कांस्टेबल की उम्मीदवारी रद्द करने का फैसला पलट दिया था। अदालत ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी को केवल प्रतिकूल सिफारिश के आधार पर निर्णय लेने के बजाय मामले का स्वतंत्र आकलन करना चाहिए। आरोपों की प्रकृति और परिस्थितियों पर विचार करना भी जरूरी है।






