UP से हैरान करने वाला मामला: गरीब मजदूर, इनकम टैक्स नोटिस-आखिर सच क्या है?
UP Shocking Tax Notice: फूस की झोपड़ी में रहने वाला दिहाड़ी मजदूर गोविंद कुमार 7 करोड़ के इनकम टैक्स नोटिस से हिल गया है। क्या यह पहचान चोरी का मामला है? सरकारी योजनाओं के नाम पर खुला बैंक खाता कैसे बना करोड़ों के लेनदेन का जरिया?

UP Labourer Income Tax Notice: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से सामने आई यह खबर किसी को भी हैरान कर सकती है। यहां रुदामऊ गांव में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर गोविंद कुमार को इनकम टैक्स विभाग की तरफ से 7 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स नोटिस मिला है। गोविंद की हालत यह है कि वे दिनभर मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं और एक फूस की झोपड़ी में रहते हैं। ऐसे में करोड़ों का टैक्स नोटिस उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है।
कौन हैं गोविंद कुमार, जिन्हें मिला करोड़ों का नोटिस?
गोविंद कुमार हरदोई जिले के रुदामऊ गांव के रहने वाले हैं। उनकी कमाई इतनी कम है कि रोज का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। पत्नी सोनी देवी और बूढ़े माता-पिता के साथ वे बेहद साधारण जिंदगी जीते हैं। परिवार वालों का कहना है कि गोविंद ने कभी इतनी कमाई की ही नहीं कि इनकम टैक्स भरने की नौबत आए।
इनकम टैक्स विभाग ने 7 करोड़ का हिसाब कैसे बना लिया?
परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि इनकम टैक्स विभाग ने यह कैसे मान लिया कि गोविंद पर 7,15,92,786 रुपये टैक्स बकाया है। नोटिस मिलने की तारीख 13 जनवरी बताई जा रही है। नोटिस देखकर पूरा परिवार सदमे में है और समझ नहीं पा रहा कि अब क्या किया जाए।
क्या फर्जी बैंक अकाउंट से जुड़ा है पूरा मामला?
गोविंद को शक है कि यह मामला उस बैंक अकाउंट से जुड़ा हो सकता है, जो करीब छह साल पहले कानपुर में काम करते वक्त उनके नाम पर खुलवाया गया था। उनका कहना है कि एक महिला ने सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने का लालच देकर उन्हें सीतापुर जिले के बिसवां ले जाकर खाता खुलवाया था।
कुछ हजार रुपये लेकर सौंप दी पासबुक और चेकबुक?
गोविंद ने बताया कि खाता खुलवाने के बदले उन्हें सिर्फ कुछ हजार रुपये दिए गए थे। बाद में उनसे पासबुक और चेकबुक ले ली गई। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनके नाम का इस्तेमाल कर कोई इतना बड़ा खेल खेल सकता है। परिवार को पूरा शक है कि किसी धोखेबाज गिरोह ने गोविंद की पहचान का गलत इस्तेमाल किया। आशंका है कि उनके नाम पर फर्जी फर्म बनाई गई और करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया, जिसकी जानकारी गोविंद को कभी नहीं दी गई।
इनकम टैक्स विभाग का क्या कहना है?
इस मामले में जब I-T इंस्पेक्टर शुभम शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि कोई टीम गांव में जाकर नोटिस देने गई हो। इससे मामला और भी रहस्यमय हो गया है। फिलहाल पूरा गांव इस मामले को लेकर हैरान है और सबकी नजर आगे होने वाली जांच पर टिकी है।
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