US Iran Tensions: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के खेश्म द्वीप और आसपास के इलाकों में जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है।
Strait of Hormuz: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के खेश्म द्वीप और आसपास के इलाकों में जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने भी कार्रवाई की। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता और कूटनीतिक बातचीत के विकल्प खुले हुए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है और उसकी आर्थिक ताकत कमजोर कर दी है।
ईरान पर अमेरिका में दो धड़े
ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और व्हाइट हाउस के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं। वहीं, डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाने की वकालत कर रहे हैं। दूसरी ओर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने के विकल्प पर जोर दे रहे हैं।
कतर ने दिया तीन दिन की राहत का प्रस्ताव
इस बढ़ते तनाव के बीच कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की पहल की है। कतर ने दोनों देशों के सामने तीन दिन की राहत का प्रस्ताव रखा है, ताकि तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्ता तलाशने का मौका मिल सके। वहीं, चीन और रूस भी दोनों देशों से बातचीत शुरू करने की अपील कर रहे हैं।
पुतिन ने दिया यूरेनियम भंडार संभालने का प्रस्ताव
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेने की पेशकश की है। इसे परमाणु मुद्दे पर तनाव कम करने की एक संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
बातचीत की उम्मीद से सस्ता हुआ कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखाई दिया है। तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों की चिंता घटी है और कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट दर्ज की गई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देश बातचीत से समाधान निकालते हैं या तनाव एक बार फिर सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।




