Asif Mahmood USCIRF: अमेरिकी आयोग के कमिश्नर डॉ. आसिफ महमूद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार, खासकर हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाया गया है और पाकिस्तान 'विशेष चिंता वाला देश' है।

Religious Persecution in Pakistan: अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के कमिश्नर डॉ. आसिफ महमूद ने पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लेकर उनका रिकॉर्ड बिल्कुल स्पष्ट है और वह लगातार वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाते रहे हैं। खास तौर पर उन्होंने हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर गंभीर चिंता जताई।

‘पाकिस्तान और चीन को लगातार घेरा है’

ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में डॉ. आसिफ महमूद ने कहा कि पाकिस्तान और चीन में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता के मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी दोनों देशों के अधिकारी अमेरिका का दौरा करते हैं, USCIRF उनके सामने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाता रहा है।

महमूद ने कहा कि उनका रिकॉर्ड इस मामले में साफ है और उन्होंने पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर घेरा है। उन्होंने बताया कि आयोग ने चीन को लेकर सुनवाई भी की है और भविष्य में भी ऐसे मुद्दे उठाए जाते रहेंगे।

पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने भी उठाया मुद्दा

USCIRF कमिश्नर ने यह बात एक सवाल के जवाब में कही कि क्या उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों के उच्चस्तरीय अमेरिकी दौरों के दौरान व्हाइट हाउस या अमेरिकी विदेश विभाग के सामने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं को उठाया है।

इस पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा कई बार रिकॉर्ड पर उठाया जा चुका है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आयोग ने पाकिस्तान को इस मामले में बार-बार सवालों के घेरे में खड़ा किया है।

हिंदू लड़कियों के मामलों पर खास नजर

डॉ. महमूद ने कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता सिर्फ USCIRF की आधिकारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वह अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए भी कई बार इन मुद्दों को उठा चुके हैं।

उन्होंने खास तौर पर हिंदू लड़कियों से जुड़े जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनके लिए विशेष चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को लेकर सामने आने वाले ऐसे मामलों पर लगातार आवाज उठाने की जरूरत है।

ईसाई, सिख और अहमदिया समुदायों का भी जिक्र

USCIRF कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। उन्होंने ईसाई, सिख और अहमदिया समुदायों का भी जिक्र किया और कहा कि इन समूहों के अधिकारों को लेकर भी लगातार चिंता जताई जाती रही है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले कथित उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों पर कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले उनके विशेष फोकस में रहे हैं।

पाकिस्तान को CPC सूची में रखने की सिफारिश

डॉ. आसिफ महमूद ने बताया कि USCIRF ने पाकिस्तान और चीन दोनों को ‘विशेष चिंता वाले देश’ (Countries of Particular Concern-CPC) के रूप में नामित करने की सिफारिश की है। अमेरिका में यह श्रेणी उन देशों के लिए इस्तेमाल की जाती है, जहां सरकारें धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में शामिल होने या उन्हें रोकने में नाकाम रहने की स्थिति में पाई जाती हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से CPC सूची के लिए अनुशंसित देशों में शामिल रहा है। उनके मुताबिक, USCIRF की सिफारिश को अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से स्वीकार करने में काफी समय लगा।

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव

USCIRF कमिश्नर का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित धार्मिक उत्पीड़न, भेदभाव और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बहस का हिस्सा बने हुए हैं।

महमूद के बयान से साफ है कि USCIRF पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर अपना दबाव बनाए रखना चाहता है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को अमेरिकी नीति के स्तर पर लगातार उठाने की वकालत कर रहा है।