उत्तर प्रदेश में सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 2025-26 में 7 नई ड्रेन परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। साथ ही 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य रखा गया है, जिससे बाढ़ नियंत्रण, बेहतर सिंचाई और किसानों की आय में सुधार होगा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। बेहतर जल प्रबंधन, किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा, बाढ़ की समस्या में कमी और आय बढ़ाने के उद्देश्य से ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार और ड्रेनों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं का निर्माण

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सिंचाई व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी आसान होगी और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।

बहराइच, बिजनौर, गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में ड्रेन परियोजनाएं

नई ड्रेन परियोजनाओं के तहत गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में एक-एक ड्रेन और बिजनौर और बहराइच में दो-दो ड्रेन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन सभी परियोजनाओं पर कुल 74.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजनाओं के पूरा होने से संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “हर खेत को पानी” के विजन को भी मजबूती मिलेगी।

ड्रेनों की सफाई से बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई में सुधार

ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ड्रेनों की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। बाढ़ और सालभर पानी के बहाव से ड्रेनों में गाद और सिल्ट जमा हो जाती है, जिससे खेतों तक पानी पहुंचने में दिक्कत आती है।

17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 11,065 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शेष सफाई कार्य मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य पर विभाग की निगरानी

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ परियोजनाएं पूरी हों। इससे किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल मिलेगा, जलभराव और बाढ़ की समस्या में कमी आएगी और कृषि उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीण जीवन स्तर में भी सुधार होगा।