West Bengal Political Murder Case: टोल प्लाज़ा UPI पेमेंट से खुला चौंकाने वाला सुराग! पश्चिम बंगाल में CM सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या केस में पुलिस को हत्यारों तक पहुंचने की उम्मीद। CCTV, चोरी की गाड़ियाँ और यूपी-बिहार कनेक्शन से साजिश का रहस्य और गहरा गया, जांच में पेशेवर हिट टीम का शक।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति उस समय दहल उठी जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी और पूर्व वायु सेना कर्मी, चंद्रनाथ रथ की बीच सड़क पर दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, लेकिन अब एक डिजिटल सुराग (UPI Payment) ने जाँच की दिशा बदल दी है। बैली टोल बूथ पर की गई एक छोटी सी ऑनलाइन पेमेंट अब हत्यारों के गले का फंदा बन सकती है।

200 मीटर का फासला और मौत का 'प्रोफेशनल' जाल
बुधवार की वह रात चंद्रनाथ रथ के लिए आखिरी साबित हुई। जब वे मध्यमग्राम में अपने घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर थे, तभी एक चांदी के रंग की निसान माइक्रा ने उनकी महिंद्रा स्कॉर्पियो को ओवरटेक कर रोक लिया। सस्पेंस तब गहरा गया जब जाँच में पता चला कि शूटर्स को रथ की गाड़ी में बैठने की सटीक लोकेशन पता थी। जैसे ही गाड़ी रुकी, बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें बिल्कुल करीब से निशाना बनाया। SIT के अधिकारियों का मानना है कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक बेहद 'प्रोफेशनल हिट' था जिसे सटीक सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया।

बैली टोल प्लाज़ा: जहां कातिलों ने छोड़ी अपनी 'परछाईं'
हत्यारों ने चकमा देने के लिए वारदात के बाद निसान माइक्रा को छोड़ दिया और एक लाल रंग की कार और मोटरसाइकिल का सहारा लिया। लेकिन भागते समय वे एक बड़ी गलती कर बैठे। पुलिस ने CCTV फुटेज के जरिए कोलकाता के पास बैली टोल बूथ पर उस संदिग्ध कार को ट्रैक किया है। यहाँ कार सवार लोगों द्वारा किया गया एक UPI पेमेंट अब पुलिस के लिए 'गोल्डन क्लू' बन गया है। इस डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए पुलिस उस बैंक खाते और मोबाइल नंबर तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जो कातिलों के असली चेहरों को बेनकाब कर सकता है।
बिहार-यूपी कनेक्शन: क्या बाहर से बुलाए गए थे शूटर्स?
जाँच का दायरा अब बंगाल की सीमाओं को लांघ चुका है। शुरुआती जाँच में चोरी की गाड़ियों और मोटरसाइकिलों के इस्तेमाल से यह साफ हो गया है कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह है। पुलिस की दो विशेष टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार रवाना की गई हैं। अधिकारियों को संदेह है कि स्थानीय अपराधियों ने केवल 'लॉजिस्टिक सपोर्ट' दिया था, जबकि मुख्य शूटर्स को पड़ोसी राज्यों से सुपारी देकर बुलाया गया था। इस ऑपरेशन में कम से कम आठ लोगों के शामिल होने का अंदेशा है।

तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर और सुलगते सवाल
इस बीच, पूर्व वायु सेना कर्मचारी रथ का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव 'कुलुप' पहुँचा, तो माहौल गमगीन हो गया। राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे अपने नेता को देख लोगों का गुस्सा और दुख सातवें आसमान पर था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के लिए यह न केवल एक व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि उनकी सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।


