पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस ने अरेंज मैरिज को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. लोग पूछ रहे हैं कि सिया गोयल ने शादी से इनकार करने की बजाय अपने मंगेतर की हत्या क्यों की? इस तरह के मामलों के पीछे की साइकोलॉजी क्या है, आइए समझते हैं।

प्यार किसी और से, लेकिन घर वालों के दबाव में शादी किसी और से. ऐसी लव-ट्रायंगल वाली कहानियां अक्सर खूनी अंजाम तक पहुंच रही हैं. पुणे में हुआ केतन अग्रवाल का मर्डर भी कुछ ऐसी ही कहानी है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल ये कि सिया गोयल ने अपने होने वाले पति केतन को मारने की बजाय शादी से मना क्यों नहीं कर दिया?

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हत्या के पीछे की वजह क्या है?

मामला ये है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी एक-दूसरे से प्यार करते थे. लेकिन सिया की शादी केतन अग्रवाल से तय हो गई थी. सिया इस शादी से खुश नहीं थी, इसलिए उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया. अब सवाल उठता है कि सिया सीधे-सीधे शादी से इनकार करके चेतन से शादी कर सकती थी, फिर एक बेकसूर केतन को मारने की क्या जरूरत थी? इस सवाल का जवाब हमने मनोवैज्ञानिकों से जानने की कोशिश की.

बहुत ज्यादा प्यार और परिवार का दबाव है वजह!

साइकोलॉजिस्ट डॉ. बिंदा सिंह के मुताबिक, ऐसी घटनाओं के पीछे कई मानसिक और सामाजिक वजहें होती हैं. वो कहती हैं कि जब किसी लड़की को परिवार में अपनी बात कहने की आजादी नहीं मिलती, उसकी भावनाओं को नहीं समझा जाता, तो वह बाहर सहारा ढूंढती है. घर में लंबे समय तक घुटन और दबाव महसूस करने से उसका व्यवहार बदल सकता है. कभी-कभी प्यार धीरे-धीरे जुनून में बदल जाता है. ऐसी हालत में, इंसान को लगता है कि उसके पास कोई और रास्ता नहीं बचा. वह सही और गलत के बीच का फर्क समझे बिना जल्दबाजी में फैसला कर लेता है. सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया भी लोगों को असल जिंदगी से दूर कर रही है. लोग अपनी बनाई दुनिया में इतना खो जाते हैं कि उन्हें सच और कल्पना में फर्क ही नहीं पता चलता. हालांकि, एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि पूरी जांच के बिना किसी भी आरोपी की मानसिक हालत पर कोई पक्का फैसला नहीं सुनाया जा सकता.

ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च क्या कहती है?

इस तरह के मामलों को समझने के लिए, ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी (AIC) ने 2020 में एक अहम स्टडी की थी. यह स्टडी उन महिलाओं पर थी, जिन्होंने अपने पार्टनर की हत्या की. यह रिसर्च 2004 और 2014 के बीच ऑस्ट्रेलिया में दर्ज हुए 115 मामलों पर आधारित थी. रिसर्च में पाया गया कि लगभग 48 प्रतिशत हत्याएं पूरी प्लानिंग के साथ की गई थीं. इसका मतलब है कि ये गुस्से में अचानक नहीं हुईं, बल्कि पहले से सोची-समझी साजिश थीं. कुछ महिलाओं ने पार्टनर के सोते हुए हमला किया, तो कुछ ने अपने प्रेमियों की मदद से हत्या को अंजाम दिया. रिसर्च में यह भी सामने आया कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं लंबे समय से घरेलू हिंसा, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थीं. कुछ मामलों में आत्मरक्षा (self-defence) की बात भी सामने आई. इसलिए, हर मामले को एक ही नजर से देखना सही नहीं है.

महिला आरोपियों के तीन तरह के मामले

AIC की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला आरोपियों के मामलों को मोटे तौर पर तीन कैटेगरी में बांटा गया है

  1. वो महिलाएं जो लंबे समय से घरेलू हिंसा या शोषण का शिकार थीं.
  2. वो महिलाएं जिन्होंने झगड़े, जलन या ब्रेकअप की वजह से जुर्म किया.
  3. वो महिलाएं जिन्होंने पैसों के लिए, किसी नए प्रेम संबंध या दूसरे निजी कारणों से हत्या की.

रिपोर्ट यह भी बताती है कि जुर्म करने के मामले में महिलाओं और पुरुषों के तरीके अक्सर अलग होते हैं. महिलाएं किसी तीसरे की मदद लेना, जहर देना, सोते हुए हमला करना या पहले से प्लान बनाने जैसे तरीके ज्यादा अपनाती हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हर लड़की को एक ही तराजू में तौला जाए.