गुजरात के भुज में एक कॉलेज की 60 से ज्यादा छात्राओं के कपड़े उरवाने के मामले पर चौकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच में सामने आया है कि कॉलेज में एडमिशन के समय ही छात्राओं को साफ तौर पर यह बताया जाता था कि पीरियड्स के दौरान वो बाकी लड़कियों के साथ खाना नहीं खाएंगी और इस दौरान वो अपने बेड की बजाय जमीन पर सोएंगी। 

भुज. गुजरात के भुज में एक कॉलेज की 60 से ज्यादा छात्राओं के कपड़े उरवाने के मामले पर चौकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच में सामने आया है कि कॉलेज में एडमिशन के समय ही छात्राओं को साफ तौर पर यह बताया जाता था कि पीरियड्स के दौरान वो बाकी लड़कियों के साथ खाना नहीं खाएंगी और इस दौरान वो अपने बेड की बजाय जमीन पर सोएंगी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी जांच के दौरान 68 में से 44 लड़कियों के साथ बातचीत की है। 

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3 महिला सदस्य सस्पेंड
इस मामले पर कार्रवाई करते हुए श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट की महिला स्टाफ की 3 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया है। यह घटना (एसएसजीआई) में कथित तौर पर 11 फरवरी को हुई। यह संस्थान स्वामीनारायण मंदिर के एक न्यास द्वारा चलाया जाता है। एक छात्रा ने बताया कि यह घटना एसएसजीआई परिसर के एक छात्रावास में हुई। इस परिसर में स्नातक और पूर्व स्नातक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होती है।

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प्रधानाचार्या के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
छात्रावास में रहने वाली एक लड़की का कहना है कि उन्हें छात्रावास प्रशासन ने कॉलेज की प्रधानाचार्या रीता रनींगा के कहने पर परेशान किया। छात्रा ने इस घटना में शामिल कर्मचारियों और प्रधानाचार्या के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या है मामला ?
श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में 11 फरवरी के दिन 68 लड़कियों के कपड़े उतरवाकर उनकी जांच की गई थी। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि हॉस्टल के नियम के अनुसार पीरियड्स के दौरान लड़कियां बाकी लड़कियों के साथ खाना नहीं खाएंगी। पर कुछ लड़कियों ने नियम तोड़ा था, जिसका पता लगाने के लिए यह जांच की गई थी।