अमरिंदर ने कहा कि गोगोई को मनोनीत किये जाने से लोग निश्चित तौर पर आश्चर्यचकित होंगे और प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी विवेकी व्यक्ति सरकार के इस तरह के कदम के खिलाफ होगा।’’ सिंह ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘यह (राज्यसभा में गोगोई का मनोनयन) स्पष्ट संकेत करता है कि वह केंद्र की मौजूदा सरकार के लिये उपयोगी रहे थे।’’

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई को राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किये जाने पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाते हुए कहा कि ‘इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह केंद्र की मौजूदा सरकार के लिये उपयोगी रहे थे।’

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सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए संस्थाओँ को इस्तेमाल नहीं करे

अमरिंदर ने कहा कि गोगोई को मनोनीत किये जाने से लोग निश्चित तौर पर आश्चर्यचकित होंगे और प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी विवेकी व्यक्ति सरकार के इस तरह के कदम के खिलाफ होगा।’’ सिंह ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘यह (राज्यसभा में गोगोई का मनोनयन) स्पष्ट संकेत करता है कि वह केंद्र की मौजूदा सरकार के लिये उपयोगी रहे थे।’’

उन्होंने राज्य में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सरकारों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, वे ‘राजनीतिक फायदे’ के लिये संस्थाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जैसा कि गोगोई के मनोयन किये जाने के मामले में प्रतीत होता है।

गोगोई के उलट रंगनाथ मिश्रा राज्यसभा जाने के लिए चुनाव लड़ा था

मुख्यमंत्री ने गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद छह महीने से भी कम समय के अंदर भाजपा नीत सरकार द्वारा उनके मनोनयन और पूर्व सीजेआई रंगनाथ मिश्रा के इसी पद से सेवानिवृत्त होने के कई साल बाद कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिये निर्वाचित होने के बीच अंतर होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘गोगोई के उलट, मिश्रा ने राज्यसभा में जाने के लिये चुनाव लड़ा था, और वह भी सीजेआई के तौर पर सेवानिवृत्त होने के करीब सात साल बाद।’’

गोगोई को चुनाव का सामना करना चाहिए था

सिंह ने इस बात का जिक्र किया कि पूर्व रक्षा कर्मी, पूर्व न्यायाधीश और अन्य अक्सर ही राजनीति में जाते हैं तथा चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व थल सेना प्रमुख जेजे सिंह को पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव में अकालियों ने उनके खिलाफ उतारा था। उन्होंने कहा कि गोगोई भी राजनीति में जाने के हकदार हैं लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति के चार-पांच साल बाद चुनाव का सामना करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भले ही विभिन्न आयोगों में नामित किया हो, उनका कोई राजनीतिक या सरकार के प्रति झुकाव नहीं था, लेकिन वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वह किसी मुख्य न्यायाधीश के लिये ऐसा नहीं करना चाहेंगे जैसा कि संभवत: गोगोई के लिये किया गया है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)