पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए 8 शरणार्थियों को नए साल से पहले ही तोहफा मिल गया। इन लोगों को सोमवार के दिन राजस्थान के कोट शहर में आधिकारिक रूप से भारत की नागरिकता मिल गई।

कोटा (राजस्थान). पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए 8 शरणार्थियों को नए साल से पहले ही तोहफा मिल गया। इन लोगों को सोमवार के दिन राजस्थान के कोट शहर में आधिकारिक रूप से भारत की नागरिकता मिल गई। यह लोग साल 2000 में पाकिस्तान सिंध से कोटा शहर आए थे।

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खुशी का नहीं था ठिकाना...
जब कोटा कलेक्टर ओम कसेरा ने इन लोगों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया तो उनके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिख रही थी। मानों उनको जिंदगी का सबसे कीमती गिफ्ट मिल गया हो। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा-हमने पाकिस्तान में बहुत पीड़ा झेली है। अब कहीं जाकर हम लोगों को सुकून मिला है।

सीआईडी इंटेलीजेंस जांच के बाद दी गई नागरिकता
बता दें कि इन लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दिया था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने सीआईडी इंटेलीजेंस से जांच करवाई और छानबीन करने के बाद राज्य के गृह विभाग के आदेश के तहत इनको सारी नागरिकता देने के आदेश हुए। जिसके बाद कलेक्टर ओम कसेरा ने प्रमाणपत्र देने के बाद फूल मालाओं से इनका स्वागत किया।

इन 8 लोगों की मिली भारत की नागरिकता 
जिन आठ लोगों को कलेक्टर ने भारत की नागरिकता दी है, उनके नाम गुरुदासमल, विद्या कुमारी, आइलमल, सुशीला बाई, रुकमणी, नरेश कुमार, सेवक और कौशल्या देवी। उन्होंने कहा-अब कहीं जाकर हम लोग भारत के नागरिक कहलाएंगे। आज हम लोग बहुत खुश हैं। 

एक तरफ किया विरोध, दूसरी तरफ दिए आदेश
एक तरफ जहां कांग्रेस लगातार इस कानून का विरोध कर रही है। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के एजेंडा पर काम करने का आरोप लगाया था। खुद प्रियंका गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कांग्रेस शासित राज्यों में नागरिकता का यह कानून लागू नहीं होगा। इसके बावजूद अब सीएम के आदेश के बाद ही नागरिकता देने का आदेश सरकार के गृह विभाग को मिला था। जिसको कोटा कलेक्टर ने पूरा किया।

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