राजस्थान के कोटा में सही न्याय न मिलने के कारण पीड़ित युवक ने पुलिस थाने के सामने ही ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की थी। दिल्ली में 5 दिन तक इलाज चलने के बाद आखिरकार वह मंगलवार 20 सितंबर की दोपहर जिंदगी से जंग हार गया। कानून व्यवस्था को लेकर CM अशोक गहलोत घिरे।

कोटा (kota). राजस्थान में कानून और न्याय व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। सोमवार को जहां नागौर जिले में दिनदहाड़े कोर्ट परिसर के बाहर पेशी पर आए गेंगस्टर की बदमाशों ने हत्या कर दी। वहीं आज एक ऐसा ही मामला राजस्थान के कोटा जिले से आया है। जहां न्याय न मिलने के चलते 5 दिन पहले पुलिस थाने के बाहर खुद को पेट्रोल से आग लगाकर आत्मदाह करने वाले युवक की मौत हो चुकी है। 

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पार्षद के खिलाफ रिपोर्ट नहीं हो रही थी, इसी से था परेशान
दरअसल कोटा के नयापुरा थाना क्षेत्र के रहने वाले राधेश्याम ने पुलिस द्वारा पार्षद के खिलाफ एफ आई आर दर्ज नहीं करने से परेशान होकर 15 सितंबर की रात नयापुरा थाने के बाहर ही खुद पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा ली। इसके बाद उसे इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया। लेकिन यहां भी उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। ऐसे में उसे इलाज के लिए दिल्ली के सफदरगंज हॉस्पिटल में रेफर किया गया था। जहां आज दोपहर उसने आखिरी सांस ली। दरअसल राधेश्याम को उसकी नवी क्लास में पढ़ने वाली बेटी स्कॉलरशिप लेने के लिए कुछ डाक्यूमेंट्स लगाने थे। लेकिन पार्षद इसी बात को लेकर आनाकानी कर रहा था। इसी झगड़े पर लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था। 

न्याय न मिलने से अभी तक राज्य में तीसरी मौत
सरकारी आंकड़ों की माने तो राजस्थान में न्याय न मिलने और सरकारी सिस्टम की लापरवाही से आत्मदाह से हुई यह तीसरी मौत है। सबसे पहले सीकर के खंडेला में एक वकील ने कोर्ट परिसर में ही आत्मदाह किया पूर्णविराम जिसकी कुछ घंटों बाद ही मौत हो गई। वहीं इसके बाद जोधपुर के ग्रामीण इलाके में बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर नहीं हटाने के विरोध में एक किसान ने आत्मदाह किया। जिसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं अब आज कोटा के इस युवक ने भी दम तोड़ दिया है।

लगातार कानून व्यवस्था और सरकारी सिस्टम की लापरवाही पर सवाल उठने के बाद इस मामले को लेकर विपक्ष भी अब प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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