रिलेशनशिप डेस्क। कई बार लोग ब्रेकअप तो कर लेते हैं, लेकिन अपने साथी को भूल पाना इतना आसान नहीं होता। पुरानी यादें पीछा नहीं छोड़तीं। तब आपको महसूस होता है कि मामूली बातों को लेकर ब्रेकअप करना गलत था। ऐसा एहसास हमेशा होता है कि आपका पार्टनर आपको कितना चाहता था। आपके लिए कितना चिंतित रहता था और हमेशा आपका ख्याल रखता था। लेकिन कुछ ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण बातें हुईं कि रिश्ते का अंत हो गया। इससे बचा जा सकता था और बचना ही चाहिए था। हो सकता है, जिसके साथ आपका ब्रेकअप हुआ हो, वह भी कुछ ऐसा ही सोच रहा हो। ऐसी स्थिति में पार्टनर्स चाहें तो फिर से मिल सकते हैं और रिश्ता बना सकते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं। टूटा रिश्ता जब दोबारा बनता है तो इससे सबों को खुशी होती है और पार्टनर्स की लाइफ में भी फिर से बहार आ जाती है। जानें ऐसी स्थिति में क्या करें।

1. नजरिया रखें सकारात्मक
दोबारा रिश्ता बनाने के लिए सकारात्मक नजरिया रखना बेहद जरूरी है। ब्रेकअप से कई लोग भीतर से टूट जाते हैं। वे निराशा और डिप्रेशन तक के शिकार हो जाते हैं। ऐसी हालत में अगर उनका अपने पहले के पार्टनर से दोबारा रिश्ता बनता है तो यह हर हाल में अच्छा होता है। इसके लिए पार्टनर से बात करें। सकारात्मक नजरिया होने पर बात बन जा सकती है। यह एक नई शुरुआत होगी।

2. करें खुशियों की तलाश
खुशियां अपने आप नहीं मिलतीं, उनकी तलाश करनी पड़ती है। किसी भी रिलेशनशिप में समस्याएं आ सकती हैं। इसका ये मतलब हर्गिज नहीं कि आप ब्रेकअप कर लें। दूसरी तरफ, गुस्से या तनाव में आकर ब्रेकअप कर भी लिया हो तो तो फिर से रिश्ता जोड़ कर खुशियों की तलाश कर सकते हैं। किसी भी नए रिश्ते में वो बात नहीं सामने आ सकती, जो पहले के रिश्ते में थी। इसलिए अलग हो चुके पार्टनर से हर हाल में रिश्ता जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए, अगर वो उस लायक हो तब। 

3. अहम को आड़े ना आने दें
ब्रेकअप में कई बार अहम की भावना की बड़ी भूमिका होती है। जब पार्टनर्स के अहम टकराते हैं तो समस्याएं पैदा होने लगती हैं। एक बार ब्रेकअप हो चुकने के बाद दोबारा मिलने में भी यही अहम की भावना आड़े आ सकती है। अहम का भाव नकारात्मक माना गया है। इससे बचना चाहिए। अच्छे लोग अपने मन में अहम की भावना नहीं रखते। 

4. रिश्ते का सही मतलब समझें
जब आप रिलेशनशिप में बंधते हैं तो यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी होती है। संबंध बनाना तो आसान है, पर उसे निभाना कठिन। इसके लिए रिश्ते का सही मतलब समझना पड़ता है। रिलेशनशिप कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं। इससे पार्टनर्स की जिंदगी और भावनाएं जुड़ी होती हैं। यह समझना होगा कि रिलेशनशिप और दोस्ती में काफी फर्क होता है।

5. जो वादा करें, उसे निभाएं
रिलेशनशिप में आपने पार्टनर से जो वादा किया है, उसे निभाएं भी। जब आप आपस में बातें करते हैं, मिलते-जुलते हैं, तभी एक-दूसरे के मन के भावों को भी समझने लगते हैं। जब आपकी फीलिंग्स मिलती हैं, तभी आगे चल कर आप रिश्ते में बंधते हैं। रिश्ते में बंधना एक तरह का वादा है, जिसे आखिर तक निभाने की कोशिश करनी चाहिए, अगर बात संभलने लायक हो। यह मत भूलें कि नई शुरुआत संभव नहीं है। यह हमेशा संभव है अगर आपका दिल पार्टनर के दिल से मिला हुआ हो। ऐसी स्थिति में ब्रेकअप आपके लिए धीमी मौत के समान होगा।