Ahoi Ashtami Story in Hindi: कार्तिक मास में अनेक व्रत-त्योहार आते हैं, अहोई अष्टमी भी इनमें से एक है। ये व्रत संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। धर्म ग्रंथों में इस व्रत का महत्व बताया गया है।

Ahoi Ashtami Vrat Katha In Hindi: 1 नवंबर, रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना से अहोई माता की पूजा करती हैं। उत्तर भारत में इस व्रत को खास महत्व दिया जाता है। पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुनने की परंपरा है। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी प्रचलित कथा।

अहोई अष्टमी व्रत की कथा

काफी समय पहले एक गांव में एक महिला अपने सात बेटों के साथ रहती थी। दिवाली से कुछ दिन पहले वह घर की सफाई और लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने जंगल गई। वहां उसे एक मिट्टी का टीला दिखाई दिया। महिला कुदाल से मिट्टी खोदने लगी। इसी दौरान गलती से उसकी कुदाल एक सेही (कांटेदार जानवर) के बच्चों को लग गई और वे मर गए।

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यह देखकर महिला बहुत दुखी हुई। वह बिना मिट्टी लिए ही घर लौट आई। जब सेही ने अपने बच्चों को मृत देखा तो वह बहुत दुखी हुई और महिला को श्राप दे दिया कि जिस तरह उसके बच्चे उससे बिछड़ गए हैं, उसी तरह महिला को भी अपनी संतान से दूर होना पड़ेगा।

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कुछ समय बाद महिला के सातों बेटे अचानक लापता हो गए। काफी समय बीतने के बाद भी वे घर नहीं लौटे। गांव के लोगों ने मान लिया कि उसके बेटों की मृत्यु हो चुकी है। यह बात सुनकर महिला गहरे दुख में डूब गई।

एक दिन वह अपने बेटों के वियोग में जान देने के इरादे से नदी की ओर जा रही थी। रास्ते में उसे एक बुजुर्ग महिला मिली। उसने महिला से उसकी परेशानी का कारण पूछा। तब उसने अपने साथ हुई पूरी घटना बता दी।

बुजुर्ग महिला ने उसे सलाह दी कि वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई माता की पूजा करे और दीवार पर सेही का चित्र बनाकर व्रत रखे। अहोई माता की सच्चे मन से पूजा करने पर उसकी संतान वापस मिल सकती है।

महिला ने बुजुर्ग की बात मानकर अहोई अष्टमी का व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से अहोई माता की पूजा की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसे दर्शन दिए और उसके सातों बेटों को सुरक्षित वापस मिलने का आशीर्वाद दिया। कुछ समय बाद उसके सभी बेटे सकुशल घर लौट आए।

मान्यता है कि तभी से संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।