Jivitputrika Vrat 2026: आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत रखा जाता है। संतान की लंबी उम्र और उनकी खुशहाली की कामना से महिलाएं इस व्रत को करती हैं।
Jitiya Vrat kab Kare: बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में जितिया व्रत खास तौर पर किया जाता है। इसे जिऊतिया, जिमूतवाहन और जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जितिया व्रत तीन दिनों तक चलने वाला पर्व है। इसकी मुख्य पूजा अष्टमी तिथि को होती है। इस साल जितिया व्रत की मुख्य पूजा 3 अक्टूबर, शनिवार को की जाएगी। व्रत रखने वाली महिलाएं संतान की लंबी उम्र और उनके सुखी जीवन के लिए पूरे दिन नियमों का पालन करती हैं। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ जितिया व्रत की कथा सुनने की भी परंपरा है।
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जितिया व्रत 2026 के शुभ मुहूर्त
सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तक
सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
दोपहर 12:15 बजे से 1:44 बजे तक
दोपहर 3:12 बजे से शाम 4:40 बजे तक
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जितिया व्रत की पूजा विधि
- 3 अक्टूबर की सुबह व्रत रखने वाली महिलाएं जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। इस दौरान भोजन से परहेज किया जाता है और मन को शांत रखते हुए किसी से विवाद नहीं करना चाहिए।
- शाम के समय पूजा की जगह को गाय के गोबर से लीपकर पवित्र किया जाता है। इसके बाद मिट्टी से छोटे तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है।
- तालाब के किनारे पाकड़ के पेड़ की टहनी लगाई जाती है। कुशा घास से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा की जाती है।
- मिट्टी या गोबर से चील और सियारिन की आकृतियां बनाकर उन्हें सिंदूर अर्पित किया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा की जाती है।
- पूजा पूरी होने के बाद जितिया व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के बिना व्रत की पूजा अधूरी मानी जाती है।
जितिया व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जीमूतवाहन नाम के एक राजकुमार थे। एक दिन उन्हें जंगल में एक नागिन रोती हुई मिली। उसने बताया कि परंपरा के अनुसार आज उसके बेटे को गरुड़ के लिए बलि देना है। जीमूतवाहन ने नागिन के बेटे की जान बचाने के लिए खुद को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया। उनकी बहादुरी और त्याग से प्रसन्न होकर गरुड़देव ने नागवंश की बलि न लेने का वचन दिया। माना जाता है कि इसी घटना के बाद संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए जीमूतवाहन की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
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