Jitiya Vrat 2026 Nahay Khay to Paran Vidhi: जितिया व्रत 2026 नहाय-खाय आज 2 अक्टूबर को है। 3 अक्टूबर को निर्जला व्रत और 4 अक्टूबर को व्रत का पारण है। ओठगन, निर्जला व्रत, पूजा सामग्री, विधि और पारण का सही समय यहां जानें। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं जरूर पढ़ें।
Jitiya Vrat 2026 Puja Vidhi: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत इस साल 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जा रहा है। इसकी शुरुआत एक दिन पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से हो रही है। इसके बाद 3 अक्टूबर को माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा होगा। पहली बार जितिया व्रत रख रही हैं तो जान लें नहाय खाय, जितया पूजा से लेकर पारण तक संपूर्ण विधि और मुहूर्त।
जितिया व्रत 2026 नहाय-खाय में क्या करें?
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- झिमनी के पत्ते पर सरसों का तेल, सरसों की खली और फूल रखें।
- नदी या तालाब में स्नान की परंपरा है; संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान कर सकते हैं।
- स्नान के बाद सरसों का तेल लगाने की स्थानीय परंपरा है।
- इसके बाद सात्विक भोजन करें।
- झिमनी का पत्ता उपलब्ध न हो तो केले के पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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3 अक्टूबर को जितिया व्रत पूजा सामग्री
- फल और नारियल
- मिठाई
- पूजा के लिए फूल
- बांस का पात्र/टोकरी
- कपड़ा, जिससे पूजा सामग्री को ढका जा सके
- परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य पूजा सामग्री
ओठगन में क्या खा सकते हैं?
- चूड़ा-दही
- फल
- नारियल पानी
- पानी या परिवार की परंपरा में निर्धारित अन्य चीजें
नोट: ओठगन में खाए जाने वाले भोजन की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है।
जितिया व्रत पूजा विधि: इन बातों का रखें ध्यान
- सूर्योदय से पहले ओठगन करने की परंपरा है।
- इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है।
- भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें और जितिया व्रत कथा सुनें।
- व्रत के दौरान चाकू, कैंची जैसी नुकीली चीजों के इस्तेमाल से बचने की स्थानीय परंपरा है।
- पूजा और व्रत की विधि अपने परिवार की परंपरा के अनुसार भी की जा सकती है।
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4 अक्टूबर को ऐसे करें जितिया व्रत पारण
- सुबह स्नान करके पूजा करें।
- पूजा के बाद संतान से पूजा में रखे फल-मिठाई आदि से कपड़ा हटवाने की परंपरा है।
- प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
- कई स्थानों पर कच्चे दूध से पारण और आम के दातून की परंपरा भी मानी जाती है।
- रांची समेत झारखंड में बताए गए पंचांग के अनुसार सुबह 7:29 बजे के बाद पारण किया जाएगा।
जरूरी सावधानी: निर्जला व्रत शरीर के लिए कठिन हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
