Hathi Pujan Vrat Katha: श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी पूजा की जाती है। इसे हाथी पूजा भी कहते हैं। इस दिन हाथी पर बैठी हुई देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है।
Mahalakshmi Vrat Katha In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस व्रत में हाथी पर बैठी हुईं देवी लक्ष्मी की पूजा की परंपरा है। इस बार ये व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत की पूजा के साथ इसकी कथा सुनने से व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। बिना कथा सुने इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़िएं इस व्रत की रोचक कथा…
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महालक्ष्मी व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मंगलार्ण नाम के एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम पद्मावती था। तवल्लक नाम का एक ब्राह्मण भी राजा के साथ रहता था, जो धर्म-कर्म में विश्वास रखता था।
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एक दिन राजा शिकार के लिए जंगल गए। इसी दौरान उन्हें बहुत तेज प्यास लगी। पानी की तलाश में तवल्लक एक तालाब के पास पहुंचे। वहां उन्होंने कुछ महिलाओं को देवी महालक्ष्मी की पूजा करते देखा।
तवल्लक ने महिलाओं से पूछा कि वे कौन-सा व्रत कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि वे महालक्ष्मी व्रत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस व्रत को मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है। यह सुनकर तवल्लक ने भी महालक्ष्मी व्रत करने का संकल्प लिया और हाथ में पवित्र सूत्र बांध लिया।
इसके बाद वह राजा के पास पानी लेकर पहुंचे। राजा की नजर तवल्लक के हाथ में बंधे सूत्र पर पड़ी तो उन्होंने उसके बारे में पूछा। तवल्लक ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत के बारे में पूरी जानकारी दी। राजा ने भी यह व्रत करने का फैसला किया और अपने हाथ में पवित्र धागा बांध लिया।
जब रानी पद्मावती ने राजा के हाथ में वह धागा देखा तो उन्होंने इसके बारे में पूछा। राजा ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत और सूत्र की पूरी बात बता दी। कथा के अनुसार, जानकारी के अभाव में रानी ने राजा के हाथ से वह सूत्र निकालकर अग्नि में डाल दिया।
इस बात से राजा बहुत नाराज हुए और उन्होंने रानी का त्याग कर दिया। इसके बाद पद्मावती को वन में जाना पड़ा। मान्यता है कि महालक्ष्मी के व्रत से जुड़े सूत्र का अपमान करने के कारण रानी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वन में भटकते हुए एक दिन पद्मावती की मुलाकात ऋषि वसिष्ठ से हुई। रानी ने उन्हें अपने साथ हुई पूरी घटना बताई। ऋषि वसिष्ठ ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। रानी ने ऋषि के बताए अनुसार श्रद्धा से महालक्ष्मी व्रत किया।
व्रत के प्रभाव से रानी का मन शांत हुआ और उनका जीवन फिर से सुखमय होने लगा। कुछ समय बाद राजा मंगलार्ण शिकार करते हुए उसी वन में पहुंचे और ऋषि वसिष्ठ के आश्रम में गए। वहां उनकी मुलाकात रानी पद्मावती से हुई।
ऋषि वसिष्ठ ने राजा को बताया कि पद्मावती ने महालक्ष्मी व्रत किया है और अब उनका मन शांत हो चुका है। ऋषि की बात मानकर राजा रानी को वापस अपने साथ महल ले आए। इसके बाद दोनों फिर सुखपूर्वक रहने लगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत श्रद्धा और नियम से करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि इस व्रत और कथा के जरिए भक्त देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
