Nirjala Ekadashi 2026 Date: इस बार साल की सबसे बड़ी एकादशी निर्जला का व्रत जून 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। जानें इससे जुड़ी पूरी डिटेल।

Kab Hai Nirjala Ekadashi: हर ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। ये साल की सबसे बड़ी एकादशी है। इसका व्रत भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं पांडवों को बताया था। मान्यता है कि सिर्फ इसी एक एकादशी का व्रत करने से पूरे साल की एकादशी व्रत करने का फल मिल सकता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। आगे जानिए इस बार कब है निर्जला एकादशी, इस दिन कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें सहित पूरी डिटेल…

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निर्जला एकादशी 25 जून 2026 शुभ मुहूर्त

- सुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तक
- दोपहर 12:02 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 12:29 से 02:10 तक
- दोपहर 02:10 से 03:50 तक

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निर्जला एकादशी व्रत-पूजा विधि

- निर्जला एकादशी से एक दिन पहले 24 जून, बुधवार की रात सात्विक भोजन करें, जमीन पर चटाई बिछाकर सोएं और ब्रह्मचर्य का पालन करें। 25 जून, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी करके रख लें। पूजा स्थान पर गौमूत्र छिड़ककर पवित्र कर लें। शुभ मुहूर्त में इस स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और इसके ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को अबीर, गुलाल, रोली, नारियल, पीले फूल, फल, दूर्वा, पूजा की सुपारी, पीले वस्त्र, हल्दी और चंदन आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें।
- पूजा के दौरान ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान विष्णु को मिठाई और फलों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते डालना न भूलें। निर्जला एकादशी व्रत की कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें।
- रात में सोएं नहीं, भजन कीर्तन करें। अगले दिन सुबह एक बार फिर से भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद व्रत का पारणा करें। इस प्रकार जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

भगवान विष्णु की आरती

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ओम जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।