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Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष 30 जनवरी को, जानें पूजा विधि-मंत्र और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat 2026: जनवरी 2026 के अंतिम दिनों में प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस दिन कईं शुभ योग भी बन रहे हैं जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है।

4 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Jan 29 2026, 10:11 AM IST
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जनवरी 2026 में कब करें प्रदोष व्रत?
Image Credit : Getty

जनवरी 2026 में कब करें प्रदोष व्रत?

Pradosh Vrat 2026 Details: पुराणों के अनुसार हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत की शुरूआत स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को की जाती है। जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से संयोग होने से प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस दिन कईं शुभ योग भी रहेंगे, जिससे इस व्रत का महत्व और भी अधिक हो गया है। आगे जानिए जनवरी 2026 के अंतिम दिनों में कब करें प्रदोष व्रत और जानें इसकी पूजा विधि, मंत्र व मुहूर्त…


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30 या 31 जनवरी, कब करें प्रदोष व्रत?
Image Credit : Getty

30 या 31 जनवरी, कब करें प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी, शुक्रवार की सुबह 11 बजकर 09 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 31 जनवरी, शनिवार को 08 बजकर 25 मिनिट तक रहेगी। चूंकि 30 जनवरी की शाम को त्रयोदशी तिथि का संयोग बन रहा है, इसलिए इसी दिन प्रदोष व्रत किया जाएगा। शुक्रवार को होने से ये शुक्र प्रदोष कहलाएगा।


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30 जनवरी 2026 प्रदोष व्रत मुहूर्त
Image Credit : Getty

30 जनवरी 2026 प्रदोष व्रत मुहूर्त

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार 30 जनवरी, शुक्रवार को प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 59 मिनिट से शुरू होगा, जो 08 बजकर 37 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 38 मिनट का समय मिलेगा।

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शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि
Image Credit : Getty

शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि

- 30 जनवरी, शुक्रवार से एक दिन पहले यानी 29 जनवरी की रात सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन भी करें।
- अगली सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए गए मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें।
- शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का पहले जल से अभिषेक करें। फिर गाय के दूध से और एक बार जल फिर से जल से अभिषेक करें।
- सबसे पहले शिवलिंग पर फूल अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक लगाएं। अगर मन में कोई इच्छा होतो बोल सकते हैं।
- इसके बाद शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, भांग आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करते रहें।
- पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप भी करते रहें। भोग लगाकर आरती करें। पूजा के बाद सात्विक भोजन करें।

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भगवान शिव की आरती (Lord shiva Aarti Lyrics in Hindi)
Image Credit : Getty

भगवान शिव की आरती (Lord shiva Aarti Lyrics in Hindi)

जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे स्वामी पंचांनन राजे
हंसानन गरुड़ासन हंसानन गरुड़ासन
वृषवाहन साजे ओम जय शिव ओंकारा
दो भुज चारु चतुर्भूज दश भुज ते सोहें स्वामी दश भुज ते सोहें
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता
त्रिभुवन जन मोहें ओम जय शिव ओंकारा
अक्षमाला बनमाला मुंडमालाधारी स्वामी मुंडमालाधारी
त्रिपुरारी धनसाली चंदन मृदमग चंदा
करमालाधारी ओम जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगें स्वामी बाघाम्बर अंगें
सनकादिक ब्रह्मादिक ब्रह्मादिक सनकादिक
भूतादिक संगें ओम जय शिव ओंकारा
करम श्रेष्ठ कमड़ंलू चक्र त्रिशूल धरता स्वामी चक्र त्रिशूल धरता
जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता
जगपालनकर्ता ओम जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्यत प्रणवाक्षर के मध्य
ये तीनों एका ओम जय शिव ओंकारा
त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावें स्वामी जो कोई जन गावें
कहत शिवानंद स्वामी कहत शिवानंद स्वामी
मनवांछित फल पावें ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

MM
Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
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