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Puri Jagannath Fact: मंदिर में कदम रखते ही क्यों बंद हो जाती है समंदर की आवाज? विज्ञान भी हैरान

जब हम किसी समुद्र तट पर जाते हैं, तो लहरों की आवाज दूर से सुनाई देने लगती है। लेकिन ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर में ऐसा नहीं है। यहां मंदिर के बाहर तो लहरों का शोर सुनाई देता है, पर गेट के अंदर कदम रखते ही यह आवाज बंद हो जाती है। जानते हैं क्यों?

2 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Jul 01 2026, 07:12 AM IST
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एक कदम और आवाज गायब!
Image Credit : gemini ai

एक कदम और आवाज गायब!

पुरी जगन्नाथ मंदिर के मुख्य द्वार को 'सिंहद्वार' कहते हैं। जब आप इस गेट के बाहर खड़े होते हैं, तो समंदर की लहरों की आवाज बिल्कुल साफ सुनाई देती है। लेकिन, जैसे ही आप एक कदम अंदर रखते हैं, यह आवाज पूरी तरह गायब हो जाती है। ऐसा लगता है जैसे आप किसी साइलेंस जोन में आ गए हों। वापस बाहर कदम रखते ही आवाज फिर से आने लगती है।

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वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
Image Credit : Getty

वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

वैज्ञानिकों ने इस रहस्य पर बहुत रिसर्च की। आमतौर पर, आवाज हवा के जरिए फैलती है। मंदिर की बनावट और ऊंची दीवारों की भी जांच हुई, लेकिन वैज्ञानिक यह पता नहीं लगा पाए कि सिर्फ एक कदम में आवाज कैसे बंद हो जाती है। विज्ञान के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं है।

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आंजनेय स्वामी की महिमा
Image Credit : ANI

आंजनेय स्वामी की महिमा

पुराणों में इस रहस्य से जुड़ी एक कहानी है। कहते हैं कि एक बार भगवान जगन्नाथ और देवी लक्ष्मी आराम कर रहे थे, लेकिन समंदर के शोर से उनकी नींद में खलल पड़ रहा था। तब भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी से कहा कि वे मंदिर के अंदर समंदर की आवाज आने से रोकें। हनुमान जी ने अपनी शक्तियों से ध्वनि तरंगों को सिंहद्वार पर ही रोक दिया।

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जंजीरों में बंधे हनुमान!
Image Credit : Getty

जंजीरों में बंधे हनुमान!

इसी पौराणिक कथा की वजह से पुरी में हनुमान जी को 'बेड़ी हनुमान' (जंजीरों में बंधे हनुमान) कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि हनुमान जी चारों दिशाओं से मंदिर की रक्षा करते हैं और समंदर के शोर को अंदर आने से रोकते हैं।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

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Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
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