Durva Ganpati Vrat August 2026: सावन मास में किया जाने वाला दूर्वा गणपति व्रत बहुत ही विशेष होता है। इस बार ये व्रत अगस्त 2026 में किया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे।
Varad Chaturthi Vrat 2026 Kab Hai: श्रावण यानी सावन को त्योहारों का महीना कहा जाता है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा चतुर्थी कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान शिव के महीने में श्रीगणेश की पूज का बहुत ही शुभ फल मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। इस बार दूर्वा गणपति व्रत 16 अगस्त, रविवार को किया जाएगा। जानिए दूर्वा गणपति व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र आदि डिटेल…
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दूर्वा गणपति 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त
16 अगस्त, रविवार को दूर्वा गणपति व्रत की पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 06 मिनिट से दोपहर 01 बजकर 44 मिनिट तक रहेगा। इसके अलावा चौघड़िया मुहूर्त में भी आप पूजन कर सकते हैं। ये हैं चौघड़िया मुहूर्त…
सुबह 07:43 से 09:19 तक
सुबह 09:19 से 10:55 तक
दोपहर 12:05 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:07 से 03:43 तक
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दूर्वा गणपति व्रत-पूजा विधि
- 16 अगस्त, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। मुहूर्त शुरू होने पर लकड़ी की चौकी पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान श्रीगणेश को कुंकुम से तिलक करें, फूलों की माला पहनाएं और पूजा स्थान के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- अबीर, कुंकुम, चावल, इत्र, सुपारी, जनेऊ, पान आदि चीजें चढ़ाएं। दूर्वा पर हल्दी लगाकर इन्हें भी श्रीगणेश को अर्पित करें।
- पूजा करते समय ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करते रहें। भगवान श्रीगणेश को मिठाई, नारियल और फलों का भोग लगाएं।
- अंत में आरती करें और प्रसाद भक्तों में बांट दें। संभव हो तो भगवान श्रीगणेश के मंत्रों का जाप भी कुछ देर तक कर सकते हैं।
- रात को जब चंद्रमा उदय हो जाए तो जल से अर्घ्य दें और फूल-चावल, कुमकुम आदि चीजें चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा करें।
- चंद्रमा की पूजा करने के बाद पहले प्रसाद खाएं इसके बाद भोजन करें। इस व्रत से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।
गणेशजी की आरती (Ganesh ji Ki Aarti)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा .
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
