Vat Purnima Vart 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार, ज्येष्ठ मास के अंतिम दिन वट पूर्णिमा व्रत किया जाता है। ये व्रत 3 दिनों तक किया जाएगा। जानें इस व्रत से जुड़ी खास बातें।
Vat Savitri Purnima Vart 2026: धर्म ग्रंथों में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तर भारत में जहां ये व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर किया जाता है, वहीं दक्षिण भारत में ये ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर करने का विधान है। इसलिए इसे वट सावित्री पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। ये व्रत लगातार 3 दिनों तक किया जाता है। कहते हैं कि इस व्रत को करने से पति की उम्र लंबी होती है और संतान सुख भी मिलता है। आगे जानिए इस बार कब है वट सावित्री पूर्णिमा व्रत…
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कब से शुरू होगा वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2026?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, वट पूर्णिमा व्रत 3 दिनों तक किया जाएगा। मुख्य पूजा ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर की जाती है। इस बार ये व्रत 27 जून, शनिवार से शुरू होगा। 2 दिनों तक व्रत के नियमों का पालन किया जाएगा और अंतिम दिन यानी 29 जून, सोमवार को पूर्णिमा तिथि पर मुख्य पूजा की जाएगी।
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कौन-कौन कर सकता है वट सावित्री पूर्णिमा व्रत?
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत महिला प्रधान व्रत है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ये व्रत करती हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार कुंवारी लड़कियां भी योग्य और मनचाहे जीवनसाथी के लिए ये व्रत कर सकती हैं। इस व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। इस व्रत से जुड़ी और भी कईं मान्यताएं हैं जो इसे और भी खास बनाती है।
वट सावित्री व्रत में क्यों करते हैं वट वृक्ष की पूजा?
हिंदू धर्म में वट वृक्ष यानी बरगद को बहुत ही शुभ माना गया है। अनेक देवी-देवताओं का वास इस पेड़ में माना जाता है। इसलिए विशेष मौकों पर इसकी पूजा की जाती है। वट सावित्री व्रत पर भी वट वृक्ष की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। इससे जुड़ी एक कथा भी है उसके अनुसार वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री के पति सत्यवान को यमराज ने पुनर्जीवित किया था। इसलिए वट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा का विशेष महत्व है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
